PM Awas Yojana Bihar: बिहार के गरीबों का ‘घर का सपना’ अधर में? नीतीश सरकार ने केंद्र से मांगे 3,000 करोड़ रुपये, मंत्री ने बताई सच्चाई
बिहार में अपना पक्का आशियाना बनाने का सपना देख रहे लाखों गरीब परिवारों के लिए विधानसभा से एक बड़ी खबर सामने आई है। बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के सामने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत बकाया फंड जारी करने की जोरदार मांग उठाई है।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र से पैसा न मिलने के कारण राज्य में हजारों गरीबों के घर का काम बीच में ही रुका हुआ है।
विधानसभा में क्या बोले मंत्री श्रवण कुमार?
बजट सत्र के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के सुचारू संचालन के लिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने अपने हिस्से (State Share) के 1,332 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिए हैं।
लेकिन, केंद्र सरकार (Central Share) की तरफ से आने वाली लगभग 3,000 करोड़ रुपये की राशि अभी तक लंबित है। इस देरी की वजह से राज्य में आवास निर्माण की रफ्तार थम गई है।
हजारों लाभार्थियों के घर का काम रुका
फंड की कमी का सीधा असर उन लाभार्थियों पर पड़ रहा है जिन्होंने अपना कच्चा मकान तोड़कर पक्का घर बनाना शुरू किया था।
- कई लाभार्थियों को पहली किस्त मिल चुकी है, लेकिन दूसरी और तीसरी किस्त के अभाव में उनके घर ‘लिंटर’ या छत के स्तर पर अटके हुए हैं।
- मंत्री ने चिंता जताई कि अगर केंद्र से राशि जल्द नहीं मिली, तो गरीब परिवारों को खुले आसमान या टूटे घरों में ही रहना पड़ेगा।
केंद्र को भेजा गया पत्र
श्रवण कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, “हमने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बकाया राशि जल्द से जल्द जारी करने का अनुरोध किया है। हम लगातार संपर्क में हैं ताकि गरीबों के आवास का काम पूरा हो सके।”
महत्वपूर्ण बिंदु
- योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G)
- मांग: 3,000 करोड़ रुपये (केंद्र का हिस्सा)
- राज्य ने जारी किए: 1,332 करोड़ रुपये
- प्रभाव: फंड की कमी से हजारों घरों का निर्माण कार्य ठप।
क्या है PMAY-G योजना?
इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ग्रामीण इलाकों में बेघर और कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक मदद देती है। इसमें केंद्र और राज्य के बीच फंड शेयरिंग का एक निश्चित अनुपात होता है। बिहार सरकार का कहना है कि उन्होंने अपना हिस्सा दे दिया है, अब बारी केंद्र की है।



