उजियारपुर: जहरीली शराब से मौत पर बवाल, भाकपा-माले ने की थाना अध्यक्ष को बर्खास्त करने की मांग; पुलिस पर लीपा-पोती का आरोप
उजियारपुर थाना क्षेत्र में कथित जहरीली शराब से हुई दो युवकों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को भाकपा-माले (CPI-ML) ने उजियारपुर पुलिस और थाना अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जगह-जगह प्रतिरोध सभाएं कीं। माले नेताओं ने पुलिस पर शराब माफियाओं को संरक्षण देने और मौत के असली कारण को छुपाने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला?
भाकपा-माले का आरोप है कि गावपुर के सन्नी ठाकुर और बेलारी के विकास महतो की मौत जहरीली शराब पीने से हुई है। लेकिन उजियारपुर पुलिस इस मामले को ‘मारपीट’ का रूप देकर रफा-दफा करने में जुटी है।
शनिवार को पार्टी ने गावपुर के योगी चौक, उजियारपुर हनुमान चौक, महिसपत्ति के महेंद्र चौक और बेलारी के खरतुहाडीह चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग उजियारपुर थाना अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह की बर्खास्तगी और मामले की उच्चस्तरीय जांच है।
“SP को भी गुमराह कर रही उजियारपुर पुलिस”
प्रतिरोध सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले नेताओं ने कहा कि उजियारपुर पुलिस अधीक्षक (SP) को भी गुमराह कर रही है। नेताओं ने कहा, “5 फरवरी 2026 को समस्तीपुर एसपी द्वारा जारी किया गया प्रेस नोट पूरी तरह भ्रामक है। पुलिस अपनी नाकामी छिपाने के लिए शराब से हुई मौतों को मारपीट की घटना बता रही है।”
नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
प्रखंड सचिव गंगा प्रसाद पासवान, जिला स्थायी कमेटी सदस्य महावीर पोद्दार और फूलबाबू सिंह समेत कई नेताओं ने एक सुर में कहा कि उजियारपुर में महुआ शराब बनाने और बेचने का धंधा पुलिस के संरक्षण में फल-फूल रहा है। नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा, “जो भी पुलिस के इस कुकृत्य के खिलाफ आवाज उठाता है, पुलिस उसे ही झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेज देती है।”
मुख्य मांगें:
- उजियारपुर थाना अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।
- मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा मिले।
- इलाके में सक्रिय शराब विक्रेताओं को चिह्नित कर उनकी संपत्ति जब्त की जाए।
- पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
प्रदर्शन में ये थे शामिल:
इस अभियान में मुख्य रूप से दीलीप कुमार राय, अर्जुन दास, मो० सकूर, सुशील कुमार सिंह, इनौस नेता राकेश कुमार सहनी, भोला पासवान, छात्र नेता रोहित कुमार पासवान और मो० फरमान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।


