1.9 किमी लंबी कोशी महासेतु बनकर तैयार, देखिए कैसे ट्रेन का ट्राइल किया गया

1.9 किलोमीटर लंबी कोशी नदी पर बनी पुल कोशी महासेतु बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र को कोसी क्षेत्र से जोड़ने का काम करेगा

उत्तरी बिहार के बिहार के दूर क्षेत्र वाले आम लोगों को 90 वर्ष पुराना सपना सच होने जा रही है। केन्द्रीय रेलवे मंत्रालय ने रविवार को ट्वीट करके ये जानकारी लोगों को शेयर किया की कोसी नदी पर बन रहे 1.9 किलोमीटर लंबी रेलवे पुल का काम पूरी कर ली गई है एवं 23 जून को इस नवनिर्मित पुल पर पहली बार एक बोगी के साथ ट्रेन का परिचालन सफलता पूर्वक कर लिया गया है।

यह 1.9 किलोमीटर लंबी कोशी नदी पर बनी पुल कोशी महासेतु बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र को कोसी क्षेत्र से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही इस महासेतु के द्वारा दरभंगा, झंझारपुर, निर्मली, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार होते हुए एक नई वैकल्पिक रेलमार्ग उपलब्ध हो जाएगा।

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कोशी महासेतु का शिलान्यास 6 जून 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा किया गया था। इस रेलवे पथ की कुल लंबाई 22 किलोमीटर है जो निर्मली को सराईगढ़ को जोड़ती है। इस पथ पर 1.9 किलोमीटर लंबे महासेतु का निर्माण करने के लिए 323.41 करोड़ की राशि 2003-2004 में स्वीकृत की गई थी।

आज 17 वर्ष बाद जब इस महासेतु का कार्य पूरा हुआ है तो अनुमानित निर्माण खर्च 516.02 करोड़ रुपए बताई जा रही है। 1934 ईस्वी में आए प्रलयंकर विनाशकारी भूकंप के कारण कोशी नदी पर 1887 ईस्वी में बनी सुपौल के निर्मली के पास बनी पुल पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। जिसके कारण सुपौल से मधुबनी और दरभंगा का संपर्क पूरी तरह से टूट गया था।

कोशी नदी जब उफान भरती है तो अपना रास्ता बदलते रहती है और इसके जल में इतना तेज कटाव होता है की बाढ़ आना तो निश्चित ही रहता है। इसलिए अभी जिस जगह पर महासेतु का निर्माण किया गया है वास्तव में पहले यहां से कोशी नदी नहीं बहती थी।

23 जून को केन्द्रीय रेल मंत्रालय के द्वारा एक स्पेशल ट्रेन का ट्राइयल करवाया गया जो की सफल रहा है। इसकी विडिओग्राफी हेलिकाप्टर के द्वारा की गई है जिसका विडिओ आप ऊपर देख सकते है।

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