Banking Rules 2026 Update: सावधान! नए साल में बदल रहे हैं ये 7 बड़े बैंकिंग नियम, आपकी जेब पर होगा सीधा असर
Banking Rules 2026 Update: साल 2026 की शुरुआत के साथ ही भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। अगर आपका भी किसी बैंक में खाता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग कानूनों में संशोधन करते हुए नए नियम लागू करने का फैसला किया है, जो आम आदमी से लेकर बैंक कर्मचारियों तक सभी को प्रभावित करेंगे।

आइये जानते हैं उन 7 प्रमुख बैंकिंग बदलावों के बारे में जो 2026 में बैंकिंग का तरीका पूरी तरह बदल देंगे:
1. नॉमिनेशन की सुविधा में बड़ा बदलाव (4 नॉमिनी तक की छूट)
अब तक बैंक खातों में केवल एक ही व्यक्ति को नॉमिनी बनाने की सुविधा थी। लेकिन नए बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम के तहत, अब खाताधारक अपने खाते के लिए एक साथ 4 नॉमिनी तक नियुक्त कर सकेंगे। यह नियम जमा खातों (FD/RD/Savings) और लॉकर दोनों पर लागू होगा। इससे परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के बंटवारे में आसानी होगी।
2. मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) के नए नियम
RBI ने बचत खातों के लिए मिनिमम बैलेंस की सीमा को लेकर भी स्पष्टता जारी की है। 31 दिसंबर 2025 के बाद प्रभावी होने वाले नियमों के अनुसार:
- शहरी क्षेत्र: बचत खाते में न्यूनतम ₹3,000 रखना अनिवार्य हो सकता है।
- ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्र: न्यूनतम सीमा ₹1,500 तय की गई है।
- नियम न मानने पर पेनल्टी के प्रावधानों को भी सख्त लेकिन पारदर्शी बनाया गया है।
3. ‘लावारिस जमा’ (Unclaimed Deposits) पर फैसला
बैंकों में वर्षों से पड़े लावारिस पैसों (Unclaimed Deposits) को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी खाते में लंबे समय तक कोई गतिविधि नहीं होती है और उसका कोई दावेदार नहीं मिलता, तो वह पैसा ‘इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड’ (IEPF) में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इससे जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा और बेहतर हो सकेगी।
4. को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए डायरेक्टर का कार्यकाल बढ़ा
सहकारी बैंकों (Co-operative Banks) की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए, निदेशकों (चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशकों को छोड़कर) का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। अब वे 8 साल की बजाय 10 साल तक अपने पद पर बने रह सकेंगे। इससे बैंकों के प्रबंधन में स्थिरता आएगी।
5. ‘सब्सटेंशियल इंटरेस्ट’ (Substantial Interest) की सीमा में बढ़ोतरी
दशकों पुराने नियम को बदलते हुए, बैंकिंग क्षेत्र में ‘सब्सटेंशियल इंटरेस्ट’ की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बदलाव आज की आर्थिक स्थिति को देखते हुए किया गया है, जिससे बैंक अधिकारियों और निदेशकों के लिए व्यापारिक हितों की परिभाषा बदल जाएगी।
6. रिपोर्टिंग की तारीखों में बदलाव
बैंकों को अब अपनी रिपोर्टिंग (जैसे CRR और SLR) के लिए ‘फोर्टनाइट’ (पखवाड़े) के बजाय महीने की 15 तारीख और आखिरी तारीख का पालन करना होगा। यह कैलेंडर आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम बैंकिंग कामकाज को और अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा।
7. बंद हो सकते हैं जीरो बैलेंस और निष्क्रिय खाते
सुरक्षा और केवाईसी (KYC) नियमों को सख्त करते हुए, ऐसे खाते जो लंबे समय से निष्क्रिय (Inactive) हैं या जिनमें जीरो बैलेंस है, उन्हें बंद करने की प्रक्रिया तेज की जा सकती है। अगर आपने पिछले 2 सालों में कोई लेन-देन नहीं किया है, तो आपका खाता ‘डॉर्मेंट’ (Dormant) हो सकता है, जिसे फिर से चालू कराने के लिए आपको बैंक जाना पड़ेगा।
ये 7 बदलाव न केवल बैंकिंग सेक्टर को आधुनिक बनाएंगे, बल्कि ग्राहकों को अपनी जमा पूंजी पर ज्यादा अधिकार और सुरक्षा भी देंगे। 2026 में इन नियमों का पालन करना हर खाताधारक के लिए अनिवार्य होगा, इसलिए समय रहते अपने बैंक से संपर्क कर अपनी जानकारी अपडेट करवा लें।



