समस्तीपुर: उजियारपुर में पुलिस-ग्रामीणों की झड़प के बाद माहौल गरमाया, विधायक आलोक मेहता ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, की ‘हत्या के प्रयास’ का केस दर्ज करने की मांग
समस्तीपुर/उजियारपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नाजीरपुर गांव में सड़क पर खड़े एक ट्रक को हटाने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

एक तरफ जहाँ पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और महिला कांस्टेबल से राइफल छीनने के प्रयास का आरोप लगाते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय विधायक ने पुलिस की इस कार्रवाई को बर्बरतापूर्ण करार देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, घटना गुरुवार देर रात की है। उजियारपुर पुलिस का गश्ती दल दारोगा राजू कुमार पासवान के नेतृत्व में नाजीरपुर गांव से गुजर रहा था। इसी दौरान ग्रामीण सड़क पर एक बड़ा ट्रक खड़ा था। बताया जा रहा है कि देवघर से कांवरिया सेवा समाप्त कर लौटे गांव के कुछ युवक उसी ट्रक से अपना सामान उतार रहे थे।
गश्ती दल ने युवकों से ट्रक को साइड करने के लिए कहा। इसी दौरान दारोगा द्वारा ट्रक में शराब होने की बात कहकर तलाशी लेने की बात कही गई, जिससे युवक भड़क गए और पुलिस के साथ उनकी तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
पुलिस (दलसिंहसराय डीएसपी विवेक कुमार शर्मा) का आरोप है कि इस दौरान भीड़ ने गश्ती दल में शामिल महिला कांस्टेबल संगीता कुमारी के साथ अभद्रता की और उनकी राइफल छीनने का भी प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सचिन कुमार, उदय कुमार और संजीत कुमार नामक तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया और 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
विधायक आलोक मेहता का गंभीर आरोप
इस घटना के बाद नाजीरपुर गांव में पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश है और उजियारपुर का माहौल काफी गरमा गया है। सोमवार को उजियारपुर के विधायक आलोक कुमार मेहता ने नाजीरपुर पहुंचकर घटना की पूरी जानकारी ली और इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
पुलिस की कार्रवाई को बेहद दुखद और निंदनीय बताते हुए विधायक ने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि एक-आध पुलिसकर्मी नशे की हालत में थे। उन्होंने न सिर्फ स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि बुजुर्गों के सिर पर टॉर्च से वार कर उनका सिर तक फोड़ दिया।
जिन तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, उनके साथ पुलिस ने ऐसी बर्बरतापूर्वक पिटाई की, उसके नाखून उखाड़ने की कोशिश की गई, उसके तलवा को मारकर काला कर दिया गया है, जैसी किसी खूंखार क्रिमिनल के साथ भी नहीं होती। जिसकी मेडिकल जांच होनी चाहिए।”
विधायक ने पुलिस की इस कार्रवाई को अहंकार की संतुष्टि बताते हुए सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “पुलिस अपने छोटे-छोटे ईगो को संतुष्ट करने के लिए झूठे मुकदमे लादकर लोगों को जेल भेज रही है, जो किसी आपराधिक गतिविधि से थोड़ा भी कम नहीं है। अगर कोई आम नागरिक इस तरह की घटना को अंजाम देता, तो उस पर ‘अटेम्प्ट टू मर्डर’ (हत्या के प्रयास) का केस दर्ज होता।
मैं सरकार से अपील करता हूँ कि ऐसे दोषी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों पर भी अटेम्प्ट टू मर्डर का केस दर्ज होना चाहिए और उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।” इसके साथ ही विधायक ने राहत भरी खबर देते हुए बताया कि उनकी समस्तीपुर के पुलिस कप्तान (एसपी) से बात हुई है। एसपी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस घटना को लेकर कोई आगे की कार्रवाई या नई गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।



