समस्तीपुर: शराब से मौत या हत्या? उजियारपुर में सन्नी ठाकुर की मौत पर पुलिस की कहानी पर उठे सवाल, प्रशासन पर ‘लीपापोती’ का बड़ा आरोप
शराबबंदी की पोल खुलने के डर से क्या पुलिस ने बदल दी मौत की वजह? गांव में चर्चा- शराब पीने से गई जान, पुलिस ने बताया आपसी विवाद में मारपीट।

(समस्तीपुर/उजियारपुर | क्राइम डेस्क): बिहार के समस्तीपुर जिले में शराबबंदी कानून का मखौल और पुलिसिया जांच का एक अजीबोगरीब चेहरा सामने आया है। उजियारपुर थाना क्षेत्र के गावपुर पंचायत (वार्ड संख्या 13) में एक 48 वर्षीय व्यक्ति, सन्नी ठाकुर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
जहाँ एक तरफ स्थानीय दबी जुबान में इसे जहरीली या देसी शराब से हुई मौत बता रहे हैं, वहीं समस्तीपुर पुलिस ने आनन-फानन में प्रेस नोट जारी कर इसे “आपसी विवाद में की गई हत्या” करार दे दिया है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और कहानी ने प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है जमीनी हकीकत? (इनसाइड स्टोरी)
स्थानीय सूत्रों और घटना के वक्त मौजूद लोगों के अनुसार, मामला शराबबंदी की विफलता से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि सन्नी ठाकुर देसी शराब का सेवन कर रहे थे। शराब पीने के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
लेकिन, जैसे ही यह खबर फैली कि ‘शराब से मौत’ हुई है, प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। आरोप है कि बिहार में शराबबंदी की नाकामी को छिपाने और अपने ऊपर गाज गिरने के डर से स्थानीय पुलिस ने मामले को पूरी तरह से घुमा दिया।
मृतक के पुत्र का बयान:

मृतक के पुत्र का बयान है कि मेरे पिता को जहरीली शराब पिलाकर मार दिया गया, और उसके बाद वो अपना घर से 100 मीटर दूर जाकर बाहर में फेंक दिया, उसके बाद जो शराब बेचने वाला था वो घर से भाग गया। शराब बेचने वाला व्यक्ति के बारे में बताया है कि उसका असली नाम तो नहीं पता लेकिन लोग उसको सत्तन-सत्तन कहते है।
वहीं पुलिस कार्यवाई को लेकर बताया है कि जब हमलोग पोस्टमार्टम करवाने गए इसी क्रम में पुलिस ने घर आकार सिग्नेचर लेके चला गया। रात में करीब 10 बजे के आसपास उन्हे फोन करके जानकारी दी गई कि आपका एफआईआर मारपीट के आधार पर दर्ज कि गई है।
वहीं मृतक के पुत्र का आरोप है कि मुझे बताए बिना जहरीली शराब से हुई हत्या को आपसी विवाद में मारपीट से हुई हत्या का रूप देकर FIR दर्ज कि गई है जो कि बिल्कुल गलत है।
पुलिस की थ्योरी: लाठी-डंडे और पुराना विवाद
समस्तीपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 05.02.2026) में पुलिस ने एक अलग ही कहानी बयां की है। पुलिस के अनुसार:
- घटना का समय: 05.02.2026 को सुबह करीब 10:00 बजे।
- पुलिस का दावा: पुलिस का कहना है कि मृतक के परिजनों ने पूछताछ में बताया कि गांव के ही बतहु सहनी, संतर सहनी, सतन सहनी और मिथलेश सहनी घर आए और सन्नी ठाकुर को बुलाकर ले गए।
- मौत की वजह: पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने मिलकर सन्नी ठाकुर की लाठी-डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। वजह 10 दिन पुराना आपसी विवाद बताया गया है।
- कार्रवाई: पुलिस ने इस मामले में उजियारपुर थाना कांड संख्या- 47/26 दर्ज कर लिया है, जिसमें धारा 103(1)/3(5) (भारतीय न्याय संहिता) लगाई गई है।
सवालों के घेरे में पुलिसिया ‘लीपापोती’
पुलिस की यह कहानी स्थानीय लोगों के गले नहीं उतर रही है। सवाल यह उठता है कि:
- अगर सन्नी ठाकुर को घर से बुलाकर पीटा गया, तो शरीर पर लाठी-डंडों के निशान और चोट की गंभीरता का जिक्र चश्मदीदों की बातों में क्यों नहीं है?
- क्या प्रशासन ने शराब से हुई मौत को हत्या में इसलिए बदल दिया ताकि सरकार के सामने शराबबंदी का रिकॉर्ड ‘साफ’ रहे?
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस ने इतनी जल्दी ‘हत्या’ का निष्कर्ष कैसे निकाल लिया?
यह घटना दर्शाती है कि कैसे बिहार में शराब से होने वाली मौतों के आंकड़ों को बाजीगरी से छिपाया जा रहा है। एक युवक की जान चली गई, लेकिन तंत्र अपनी नाकामी छिपाने के लिए मौत की वजह बदलने में जुटा है। अगर वाकई यह शराब से हुई मौत है, तो चार लोगों को नामजद कर उन्हें हत्यारा बनाना न केवल जांच प्रक्रिया का मजाक है, बल्कि निर्दोषों को फंसाने की साजिश भी हो सकती है।
निष्कर्ष: उजियारपुर की यह घटना उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करती है। केवल पुलिस की एफआईआर (FIR) पर भरोसा करने के बजाय, विसरा रिपोर्ट और निष्पक्ष मेडिकल जांच से ही सच सामने आ पाएगा कि सन्नी ठाकुर की जान लाठियों ने ली या जहरीली शराब ने।




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