पटना बनेगा ‘पाटलिपुत्र’? ‘बंबई’ मुंबई हो सकता है, तो ‘पटना’ पाटलिपुत्र क्यों नहीं? — उपेन्द्र कुशवाहा
पटना: बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलने की मांग एक बार फिर उठी है। यह मांग सिर्फ एक शहर का नाम बदलने की नहीं, बल्कि इतिहास के सुनहरे पन्नों को फिर से पलटने और मौर्य साम्राज्य के उस गौरव को जीने की है, जब भारत दुनिया का सिरमौर हुआ करता था।

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से उपेन्द्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र कर देने की मांग की है। सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखा गया है कि पटना का नाम बदलकर फिर से ‘पाटलिपुत्र’ कर दिया जाए।
“पाटलिपुत्र नाम लेते ही सीना चौड़ा हो जाता है”
सुझाव में कहा गया है कि जब मौर्य काल का साम्राज्य था, तब इस शहर की पहचान ‘पाटलिपुत्र’ के रूप में थी। यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि शक्ति और समृद्धि का प्रतीक था।
सरकार से आग्रह करते हुए कहा गया, “जब हम ‘पाटलिपुत्र’ कहते हैं, तो हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। हम एक अलग ही गौरव महसूस करते हैं। इसलिए कालखंड में जो नाम बदलकर पटना हो गया था, उसे फिर से अपने मूल स्वरूप ‘पाटलिपुत्र’ में लाया जाना चाहिए।”
कोलकाता और मुंबई बदल सकते हैं, तो पटना क्यों नहीं?
इस मांग के पीछे एक मजबूत तर्क दिया गया है। देश के कई बड़े महानगरों ने अपनी संस्कृति और पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए नाम बदले हैं:
- बंबई बना मुंबई
- कलकत्ता बना कोलकाता
- उड़ीसा बना ओडिशा
तर्क यह है कि जब इन शहरों के नाम बदले जा सकते हैं, तो बिहार की राजधानी का नाम ‘पाटलिपुत्र’ क्यों नहीं हो सकता?
अतीत के गौरव के साथ ‘नए भारत’ का निर्माण
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यह बदलाव हमें हमारे अतीत के उस स्वर्णिम क्षण से जोड़ेगा। उस गौरवशाली इतिहास को महसूस करते हुए ही हम ‘नए भारत’ के निर्माण की ओर मजबूती से प्रस्थान कर सकेंगे। सरकार को यह सुझाव दिया गया है कि जनभावनाओं और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस पर जल्द विचार किया जाना चाहिए।



