ED, CBI और CID में क्या है अंतर? जानिए किसके पास है कितनी पावर और कौन है इनका बॉस
देश में जब भी कोई बड़ा अपराध, भ्रष्टाचार या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आता है, तो अक्सर न्यूज़ चैनलों और अखबारों में ED, CBI या CID का नाम सुनने को मिलता है। आम जनता कई बार इन जांच एजेंसियों के बीच कंफ्यूज हो जाती है कि आखिर किसका क्या काम है और इनमें सबसे ज्यादा पावरफुल कौन है?

अगर आप भी इनके काम और इनके अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को लेकर उलझन में रहते हैं, तो आज हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि ED, CBI और CID में क्या अंतर है और इन सबका बॉस कौन होता है।
1. CID (Crime Investigation Department)
CID क्या है? CID यानी क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (अपराध जांच विभाग) किसी भी राज्य की पुलिस की एक विशेष जांच और खुफिया शाखा होती है। इसकी स्थापना ब्रिटिश काल में साल 1902 में हुई थी।
क्या है इसका काम? CID का दायरा सिर्फ एक राज्य तक सीमित होता है। राज्य में होने वाले गंभीर अपराधों जैसे- हत्या, अपहरण, चोरी, दंगे और धोखाधड़ी के मामलों की जांच का जिम्मा CID के पास होता है। राज्य सरकार या हाई कोर्ट किसी भी गंभीर मामले को सुलझाने का जिम्मा CID को सौंप सकती है।
कौन होता है CID का बॉस? चूंकि यह राज्य पुलिस का हिस्सा है, इसलिए CID सीधे राज्य सरकार (State Government) के प्रति जवाबदेह होती है। यह राज्य के गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और राज्य का डीजीपी (DGP) या एडीजी (ADG) रैंक का अधिकारी इसका प्रमुख होता है।
2. CBI (Central Bureau of Investigation)
CBI क्या है? CBI यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) भारत सरकार की सबसे प्रमुख और पावरफुल जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1963 में हुई थी।
क्या है इसका काम? CBI का दायरा पूरे देश में होता है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े मामलों की जांच करती है। इसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, बड़े आर्थिक घोटाले, हाई-प्रोफाइल मर्डर और आतंकवाद से जुड़े मामले शामिल होते हैं। ध्यान रहे, किसी राज्य में जांच करने के लिए CBI को राज्य सरकार की सहमति या फिर सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के आदेश की जरूरत होती है।
कौन होता है CBI का बॉस? CBI सीधे केंद्र सरकार के अधीन आती है। यह कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions) के तहत काम करती है। यह मंत्रालय सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अंतर्गत आता है। इसलिए, तकनीकी रूप से CBI का सुप्रीम बॉस प्रधानमंत्री होता है।
3. ED (Enforcement Directorate)
ED क्या है? ED यानी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (प्रवर्तन निदेशालय) देश में आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने वाली एक बेहद ताकतवर खुफिया एजेंसी है। इसकी स्थापना साल 1956 में हुई थी।
क्या है इसका काम? ED का मुख्य काम सिर्फ पैसों की हेराफेरी (Money Laundering) और विदेशी मुद्रा कानून (FEMA) के उल्लंघन की जांच करना है। अगर कोई नेता, अधिकारी या बिजनेसमैन अवैध रूप से संपत्ति बनाता है, टैक्स चोरी करके पैसा विदेश भेजता है या हवाला के जरिए लेन-देन करता है, तो वहां ED की एंट्री होती है। ED के पास अवैध संपत्ति को जब्त करने की बहुत बड़ी पावर होती है।
कौन होता है ED का बॉस? ED पूरी तरह से केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अधीन काम करती है। यह वित्त मंत्रालय के ‘राजस्व विभाग’ (Department of Revenue) का हिस्सा है। इसलिए ED का बॉस देश का वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय होता है।
एक नज़र में समझें अंतर (ED vs CBI vs CID)
| जांच एजेंसी | फुल फॉर्म | जांच का दायरा | मुख्य कार्य | रिपोर्टिंग बॉस (Boss) |
| CID | Crime Investigation Department | सिर्फ एक राज्य के भीतर | हत्या, दंगे, अपहरण (राज्य स्तर के अपराध) | राज्य सरकार (गृह मंत्रालय) |
| CBI | Central Bureau of Investigation | पूरा देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर | बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार, हाई-प्रोफाइल क्राइम | केंद्र सरकार (कार्मिक मंत्रालय / PMO) |
| ED | Enforcement Directorate | पूरा देश और विदेश में संपत्ति | मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, अवैध संपत्ति जब्ती |
आसान शब्दों में कहें तो CID राज्य स्तर की पुलिस एजेंसी है जो आम अपराधों की जांच करती है। CBI केंद्र की एजेंसी है जो देश भर में गंभीर और बड़े अपराधों की जांच करती है। वहीं, ED सिर्फ और सिर्फ पैसों के काले खेल और आर्थिक अपराधों पर लगाम कसने के लिए बनी है।



