समस्तीपुर: रात के अंधेरे में ग्रामीणों ने पकड़ा प्रेमी जोड़ा, डायल 112 की टीम ‘नाबालिग’ कहकर लौटी; लड़के के पिता को सौंप दी गई लड़की
समस्तीपुर (उजियारपुर): बिहार के समस्तीपुर जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ लखनीपुर महेशपट्टी से सटे इलाके में ग्रामीणों ने एक लड़के और लड़की को रात के अंधेरे में संदिग्ध हालत में पकड़ लिया। मामले को सुलझाने के लिए पुलिस (डायल 112) को बुलाया गया, लेकिन पुलिस दोनों को ‘नाबालिग’ बताकर बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट गई। अंततः ग्रामीणों ने पंचायत कर एक लिखित बॉन्ड के आधार पर लड़की को लड़के के पिता के सुपुर्द कर दिया।

क्या है पूरा घटनाक्रम?
घटना रविवार, 30 अगस्त 2026 की रात करीब 10 बजे की है। प्राप्त जानकारी और घटना से जुड़े एक लिखित पंचनामे के अनुसार, उजियारपुर थाना के लखनीपुर महेशपट्टी (वार्ड संख्या- 04) के रहने वाले लड़का और डोगपुर (बलभद्रपुर) निवासी नाबालिग लड़की को छतवारी गांव के लोगों ने संदिग्ध अवस्था में पकड़ लिया। संदेह होने पर ग्रामीणों ने दोनों को पकड़कर छतवारी स्थित राम जानकी मंदिर में बिठा दिया और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों की सूचना पर डायल 112 की पुलिस टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन उसने मामले में कोई कानूनी हस्तक्षेप नहीं किया। सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने लड़की को ‘नाबालिग’ करार दिया और उन्हें उनके हाल पर छोड़कर घटनास्थल से वापस लौट गए। नाबालिगों से जुड़े मामले में पुलिस का यह रवैया बाल संरक्षण कानूनों की अनदेखी और घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
लड़की के घर से नहीं आया कोई, लड़के के पिता ने लिया जिम्मा
पुलिस के जाने के बाद ग्रामीणों ने लड़की के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन लड़की के घर से कोई भी सदस्य मौके पर नहीं पहुंचा। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने लड़के के पिता को घटनास्थल (राम जानकी मंदिर) पर बुलाया।
जब लड़के के पिता वहां पहुंचे, तो ग्रामीणों की मौजूदगी में एक पंचायत हुई। इसके बाद एक हस्तलिखित आवेदन तैयार किया गया, जिसमें लड़के के पिता ने यह लिखकर दिया कि: “घटनास्थल पर पहुंचने के बाद मुझे सकुशल बच्चे और बच्ची को सौंप दिया गया है। बच्चे और बच्ची पर आगे कोई भी तरह की घटना, दुर्घटना घटती है तो इसका जिम्मेवार मैं रहूँगा।”
दर्जनों ग्रामीणों ने किए गवाह के तौर पर हस्ताक्षर
लिखित आवेदन पर लड़के और लड़की के अलावा लड़के के पिता के हस्ताक्षर हैं। इसके साथ ही इस पूरे घटनाक्रम और समझौते की पुष्टि के लिए दर्जनों ग्रामीणों ने गवाह के तौर पर अपने हस्ताक्षर किए हैं।
कानूनी रूप से कितना सही है यह फैसला?
भले ही ग्रामीणों ने अपनी समझ से मामले को शांत करा दिया हो, लेकिन कानूनी जानकारों के अनुसार एक नाबालिग लड़की को बिना किसी प्रशासनिक आदेश या बाल कल्याण समिति (CWC) की संस्तुति के, सीधे लड़के के पिता को सौंप देना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
अगर भविष्य में लड़की के साथ कोई अनहोनी होती है, तो यह ‘लिखित आवेदन’ कानूनी तौर पर पुलिस और प्रशासन की उस लापरवाही को भी कटघरे में खड़ा करेगा, जिसके तहत वे मौके से बिना कार्रवाई किए लौट गए थे। फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।



