उजियारपुर: कांवड़ यात्रा को लेकर शांति समिति की बैठक महज ‘खानापूर्ति’, कुछ वर्ष पुराने इतिहास के दोहराए जाने की आशंका
उजियारपुर में श्रावण मास की अंतिम सोमवारी और कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गांवपुर योगी चौक पर शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता दलसिंहसराय के एसडीओ किशन कुमार एवं एसडीपीओ विवेक कुमार ने संयुक्त रूप से की। प्रशासनिक महकमे से उजियारपुर के बीडीओ संजीव कुमार, सीओ अभिषेक आनंद और थानाध्यक्ष अजीत कुमार समेत कई पंचायतों के जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग भी इसमें शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण, सुगम एवं भक्तिमय माहौल में संपन्न कराने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करना था। लेकिन गाँवपुर योगी चौक पर आयोजित शांति समिति की बैठक महज एक औपचारिकता बनकर रह गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, शांति-समिति की यह बैठक सिर्फ खानापूर्ति नजर आ रही है, क्योंकि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को लेकर बुलाई गई इस बैठक में अपेक्षित जनभागीदारी बिल्कुल नहीं दिखी।
बैठक में जनप्रतिनिधियों की नदारदगी और लीपापोती
कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजन के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की उपस्थिति जरूरी थी। इसके विपरीत, बैठक में मुश्किल से आधा दर्जन जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग ही कुर्सियों पर बैठे नजर आए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि बैठक में लोगों की संख्या पूरी दिखाने के लिए पत्रकारों को भी शांति समिति के सदस्यों की तरह बैठा दिया गया। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से बैठक की गंभीरता और इसकी पूरी प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कागजों तक सीमित रहे विकास और सुरक्षा के वादे
इस बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इनमें जर्जर सड़कों की मरम्मत, रास्तों पर रौशनी की व्यवस्था, आपात स्थिति के लिए चिकित्सक एवं एंबुलेंस की उपलब्धता, सुरक्षा के लिए दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती के साथ-साथ कांवड़ यात्रा के दौरान भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने जैसे विषय शामिल थे।
हालांकि, स्थानीय लोगों का स्पष्ट रूप से मानना है कि रौशनी की व्यवस्था को छोड़ दिया जाए, तो बाकी सारे मुद्दे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे और धरातल पर इनकी कोई तैयारी नजर नहीं आएगी। लोगों की मांग है कि ये बैठकें सिर्फ कागजी न रहें, बल्कि सुविधाओं को असल में दुरुस्त किया जाए। यदि जनप्रतिनिधि ही बैठक में नहीं आएंगे, तो क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं और सुझावों का आदान-प्रदान कैसे होगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।
10-12 साल पुरानी खौफनाक घटना के दोहराए जाने का डर
प्रशासन के इस लापरवाह रवैये ने स्थानीय लोगों के मन में एक पुराने खौफ को फिर से जिंदा कर दिया है। लोगों ने याद दिलाया कि आज से करीब 10-12 साल पहले भी प्रशासन ने ठीक इसी तरह की खानापूर्ति वाली बैठक आयोजित की थी। उस लापरवाही का सीधा नतीजा यह हुआ था कि रात 10 बजे के बाद गाँवपुर योगी चौक किसी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया था। पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों ने एक बार फिर उसी तरह की औपचारिकता पूरी कर उसी खौफनाक इतिहास के दोहराए जाने की आशंका को जन्म दे दिया है।



