समस्तीपुर न्यूज़: कोबरा के डंसने से मृतप्राय हुई महिला, अस्पताल कर्मियों ने CPR और 36 वायल वेनम देकर बचाई जान
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले से स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। कल्याणपुर थाना क्षेत्र में कोबरा के डंसने से गंभीर रूप से घायल एक 55 वर्षीय महिला की जान सदर अस्पताल के कर्मियों की सूझबूझ से बच गई। जिस मरीज का पल्स रेट शून्य हो चुका था और डॉक्टर रेफर करने की तैयारी कर रहे थे, उसे अस्पताल के कर्मियों ने सीपीआर (CPR) और 36 वायल एंटी-स्नेक वेनम (ASV) देकर मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।

आलू निकालते समय कोबरा ने डंसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल्याणपुर थाना क्षेत्र के खजुरी (वार्ड संख्या-2) निवासी ठिठर ठाकुर की पत्नी गायत्री देवी (55) शुक्रवार सुबह सब्जी बनाने के लिए घर में रखे आलू निकाल रही थीं। इसी दौरान आलू के बीच छिपे एक कोबरा ने उनके दाहिने हाथ में डंस लिया। महिला के चिल्लाने पर परिजन और पड़ोसी इकट्ठा हुए और उन्हें आनन-फानन में समस्तीपुर सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। उनके दोनों बेटे दूसरे प्रदेश में काम करते हैं और वे घर पर पति के साथ अकेली रहती हैं।
पल्स रेट था शून्य, रेफर करने की हो चुकी थी तैयारी
अस्पताल पहुंचने तक जहर महिला के शरीर में फैल चुका था। वे पूरी तरह अचेत थीं, उनका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर चुका था और पल्स रेट बिल्कुल नहीं मिल रहा था। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए ऑन-ड्यूटी डॉक्टर ने उन्हें तत्काल हायर सेंटर रेफर करने की कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
कर्मियों की तत्परता और 36 वायल वेनम का इस्तेमाल
रेफर करने की गहमागहमी के बीच, अस्पताल कर्मी अखिलेश कुमार को महिला के गले के पास सांस चलने के बेहद हल्के संकेत मिले। उन्होंने बिना एक पल गंवाए महिला को सीपीआर (CPR) देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों के बाद महिला के शरीर में हलचल हुई और पल्स वापस आ गई।
इसके तुरंत बाद डॉक्टरों के निर्देश पर महिला को एंटी-स्नेक वेनम की 10 वायल दी गईं। चूंकि ऑक्सीजन लेवल काफी कम था और परिजनों के पास निजी अस्पताल (वेंटिलेटर सपोर्ट) जाने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए कर्मी अखिलेश और नीरज ने इमरजेंसी वार्ड में ही ऑक्सीजन सपोर्ट की व्यवस्था की। इलाज के दौरान स्थिति में सुधार लाने के लिए 13 वायल और दी गईं। 24 घंटे के भीतर महिला को कुल 36 वायल एंटी-स्नेक वेनम चढ़ाई गई। लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट और इलाज के बाद उनकी स्थिति स्थिर हुई और उन्हें आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया।
समय पर इलाज ही बचाव: डीएस
सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने स्वास्थ्यकर्मियों के इस सराहनीय प्रयास की पुष्टि की है। उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि सांप काटने पर झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय बर्बाद न करें। मरीज को बिना देरी किए सरकारी अस्पताल लाएं, ताकि समय पर इलाज कर जान बचाई जा सके।
सदर अस्पताल में अगस्त के सर्पदंश के आंकड़े:
समस्तीपुर सदर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में अब तक कुल 56 मामले आए जिसमें से समय पर पहुँचने वाले 30 लोगों की जान बचा ली गई। 8 ऐसे लोग थे जो समय पर न पहुँचने के कारण उसको बचाया नहीं जा सका, अन्य बची हुए मरीजों को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।



