KSR कॉलेज को बचाने के लिए सरायरंजन से पटना तक ऐतिहासिक पदयात्रा 16 अगस्त से, राजनेताओं पर ‘अपनों’ को फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप
समस्तीपुर/सरायरंजन: समस्तीपुर जिले के सरायरंजन स्थित ऐतिहासिक धरोहर ‘KSR कॉलेज’ को ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना की आड़ में तोड़े जाने की कथित साजिश के खिलाफ अब एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो गया है। शिक्षा और जनहित की रक्षा के लिए ‘KSR कॉलेज बचाओ आंदोलन समिति’ के बैनर तले आगामी 16 अगस्त 2026 से सरायरंजन से पटना तक एक ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली जाएगी। इस पदयात्रा का नेतृत्व समाजसेवी कुणाल कुमार करेंगे।

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर समिति ने स्थानीय प्रशासन और राजनेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “शिक्षा व जनहित की बलि चढ़ाकर अपनों को रेवड़ियां बांटने का खेल” करार दिया है। यह पदयात्रा पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास तक जाएगी।
‘अपनों’ की जमीन बचाने के लिए कॉलेज की बलि चढ़ाने का आरोप
विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट (रूट) में जानबूझकर बदलाव किया गया है। आरोप है कि राजस्व विभाग के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO) को पहले RO बनाकर राजनीतिक प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई और बाद में उन्हें DTO बनाया गया। समिति का सीधा आरोप है कि इन्हीं के संरक्षण में कथित रूप से एक मंत्री के रिश्तेदारों और करीबियों की कीमती जमीनों को बचाने के लिए KSR कॉलेज को बलि चढ़ाया जा रहा है।
इसके अलावा, यह भी दावा किया गया है कि सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। करीबी लोगों के प्लॉट को बचाने के लिए बिहार सरकार की 8 एकड़ जमीन और पहले से उपलब्ध 3-4 एकड़ अधिगृहीत जमीन को दरकिनार कर, एक निजी जमीन का महंगा अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ा है।
झूठे आश्वासनों और ऑडियो रिकॉर्डिंग का खुलासा
समाजसेवी कुणाल कुमार के अनुसार, इस मुद्दे को सबसे पहले 4 मई को उठाया गया था, लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। 8 मई को मंत्री विजय कुमार चौधरी द्वारा एक बैठक बुलाकर झूठा नोटिफिकेशन पत्र दिखाकर जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया गया है।
विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि जून महीने में NHAI द्वारा दबाव में आकर एक भ्रामक स्पष्टीकरण जारी किया गया था। हालांकि, कुणाल कुमार ने NHAI अधिकारियों से सीधी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराकर उनके स्पष्टीकरण की पोल खोल दी, जिसके बाद NHAI को बैकफुट पर आना पड़ा।
“विकास चाहिए, लेकिन विरासत की बलि देकर नहीं”
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी कुणाल कुमार ने स्पष्ट किया है कि, “यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरायरंजन के भविष्य, शिक्षा और पारदर्शी व्यवस्था को बचाने का जन-सत्याग्रह है। KSR कॉलेज केवल एक ईमारत नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की शैक्षणिक पहचान है। अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए कॉलेज को तबाह करना सरायरंजन की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।”
आंदोलन की मुख्य मांगें:
- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण हो, लेकिन KSR कॉलेज का अस्तित्व पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
- एक्सप्रेसवे का वैकल्पिक मार्ग तय किया जाए और तर्कसंगत तरीके से कट लागू किया जाए।
जनता से अपील
‘KSR कॉलेज बचाओ आंदोलन समिति’ ने सरायरंजन और समस्तीपुर के सभी छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और आम जनता से अपील की है कि वे 16 अगस्त को इस पदयात्रा में भारी संख्या में शामिल होकर इस क्रांति को ऐतिहासिक बनाएं।



