समस्तीपुर: संत कबीर हॉस्पिटल की कथित लापरवाही से मरीज ने गंवाया पैर, झोलाछाप डॉक्टरों पर सर्जरी करने का गंभीर आरोप
समस्तीपुर/विद्यापतिनगर: समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर प्रखंड अंतर्गत शेरपुर गांव के निवासी अमित कुमार के साथ घटी एक दुखद घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दलसिंहसराय स्थित ‘संत कबीर हॉस्पिटल’ के डॉक्टरों और सपोर्ट स्टाफ की कथित लापरवाही के कारण अमित को अपना एक पैर हमेशा के लिए गंवाना पड़ा है। इस घटना को लेकर मरीज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अस्पताल की भयावह सच्चाई और अपनी दर्दनाक आपबीती सुना रहा है।

क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में पीड़ित मरीज अमित कुमार ने बताया कि एक दुर्घटना में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। त्वरित इलाज की उम्मीद में उन्हें दलसिंहसराय स्थित संत कबीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। मरीज और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने बिना कोई उचित उपचार किए उन्हें तीन दिनों तक बेड पर सिर्फ भर्ती रखा। जब तीन दिन बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ और स्थिति बिगड़ने लगी, तो परिजनों ने बिना औपचारिक डिस्चार्ज का इंतजार किए, जबरन मरीज को वहां से निकाला और एम्स ले जाकर भर्ती कराया।
एम्स के डॉक्टरों का खुलासा: सही समय पर इलाज मिलता तो बच जाता पैर
एम्स पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी। मरीज का पैर धीरे-धीरे सड़ने (Infection/Gangrene) लगा था। जान बचाने के लिए एम्स के डॉक्टरों के पास अमित का पैर काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। पीड़ित के अनुसार, एम्स के डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से बताया कि यदि दुर्घटना के 6 से 8 घंटे के भीतर मरीज का सही तरीके से इलाज शुरू कर दिया जाता, तो पैर काटने की नौबत कभी नहीं आती।
डिग्री BHMS की, और बोर्ड पर लिखा है ‘MS ऑर्थोपेडिक्स’
वायरल वीडियो में मरीज ने संत कबीर हॉस्पिटल पर कई चौंकाने वाले और गंभीर आरोप लगाए हैं। अमित का दावा है कि इस अस्पताल में इलाज करने वाले सभी डॉक्टर फर्जी हैं और किसी के पास भी मेडिकल काउंसिल का वैध लाइसेंस नहीं है। सबसे संगीन आरोप यह है कि यहाँ BHMS (होम्योपैथी) की डिग्री वाले डॉक्टर अपने नाम के आगे ‘MS ऑर्थोपेडिक्स’ लिखकर मरीजों की सर्जरी कर रहे हैं। मरीज ने भारी मन से कहा कि यह पूरा अस्पताल फर्जी डॉक्टरों का अड्डा बन चुका है।
जांच और कड़ी कार्रवाई की उठी मांग
अस्पताल की कुव्यवस्था, स्टाफ की लापरवाही और फर्जीवाड़े को लेकर वायरल हुए इस वीडियो के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। आम जनता ने बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विधिवत जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच में मरीज द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले ऐसे अस्पताल का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और सभी जिम्मेदार कर्मियों व कथित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस घटना के बाद से क्षेत्र के अन्य निजी नर्सिंग होम्स की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग गया है।



