जमालपुर को स्वतंत्र रेल मंडल बनाने की उठी मांग, RTI कार्यकर्ता ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र
मुंगेर/जमालपुर: भारतीय रेलवे की जन्मस्थली कहे जाने वाले ऐतिहासिक जमालपुर को स्वतंत्र रेल मंडल (Railway Division) बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। मुंगेर जिले के धरहरा निवासी, वरिष्ठ नागरिक और आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र लिखकर जमालपुर को पूर्व मध्य रेल (ECR) के अंतर्गत नया रेल मंडल घोषित करने का आग्रह किया है।

163 वर्षों की ऐतिहासिक धरोहर को अब तक नहीं मिला हक
रेल मंत्री को भेजे गए अपने मांग पत्र में श्याम मुरारी प्रसाद ने जमालपुर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने याद दिलाया कि 08 फरवरी 1862 को ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा जमालपुर में भारत का पहला पूर्ण रेल कारखाना स्थापित किया गया था, जो आज भी एशिया का सबसे बड़ा और पुराना लोकोमोटिव वर्कशॉप है।
पत्र में रेल मंत्री के 23 मई के जमालपुर निरीक्षण का भी हवाला दिया गया है, जिसमें स्वयं मंत्री महोदय ने जमालपुर वर्कशॉप को देश की पहली ‘फुल-फ्लेज्ड’ वर्कशॉप सुविधा (First Full-Fledged workshop facility) माना था। कार्यकर्ता ने क्षोभ व्यक्त किया है कि 163 वर्षों के शानदार इतिहास के बाद भी इस ऐतिहासिक धरोहर को रेल मंडल का दर्जा नहीं मिल सका है।
इसके परिणामस्वरूप न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है, बल्कि वर्कशॉप का आधुनिकीकरण भी धीमा है और पूरा अंग प्रदेश रेल कनेक्टिविटी के मामले में पिछड़ रहा है।
पत्र में रखी गईं तीन प्रमुख मांगें:
जनहित को ध्यान में रखते हुए आरटीआई कार्यकर्ता ने रेल मंत्री के समक्ष मुख्य रूप से तीन विनम्र मांगें रखी हैं:
- नया रेल मंडल बने: जमालपुर को पूर्व मध्य रेल (ECR) में एक नए और स्वतंत्र रेल मंडल के रूप में अधिसूचित किया जाए।
- रेल नगरी विकास प्राधिकरण का गठन: भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत इंजीनियरिंग संस्थान (IRIMEE), जमालपुर वर्कशॉप और साहिबगंज लूप को एकीकृत करके ‘रेल नगरी विकास प्राधिकरण’ बनाया जाए।
- राष्ट्रीय विरासत दिवस: 08 फरवरी (कारखाना स्थापना दिवस) को भारतीय रेल के लिए ‘राष्ट्रीय विरासत दिवस’ के रूप में घोषित किया जाए।
हमें राजनीति नहीं, परिणाम चाहिए अपने पत्र के अंत में श्याम मुरारी प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि यह मांग किसी राजनीतिक दल, सांसद, विधायक या एमएलसी की नहीं है, बल्कि यह उन हजारों कारीगरों और उनके परिवारों की आवाज है, जिन्होंने पीढ़ियों से रेलवे को जीवित रखा है। उन्होंने कहा, “हम राजनीति से परे केवल जनहित की भावना से यह पत्र लिख रहे हैं और हमें सिर्फ परिणाम चाहिए।



