उजियारपुर: आदित्य भारत गैस एजेंसी की मनमानी, होम डिलीवरी बंद, ऑनलाइन बुकिंग पर भी धक्के खा रहे उपभोक्ता
उजियारपुर (समस्तीपुर): जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत बैंक रोड स्थित ‘आदित्य भारत गैस एजेंसी’ में इन दिनों घोर अव्यवस्था और मनमानी का आलम है। गोदाम में पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध होने के बावजूद एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी की सुविधा नहीं दी जा रही है।

हालात ये हैं कि डिजिटल युग में ऑनलाइन बुकिंग और पेमेंट करने वाले ग्राहकों को भी गैस लेने के लिए दिन-भर एजेंसी के चक्कर काटने और धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार को एजेंसी पर मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, बुधवार को जैसे ही एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरा एक ट्रक एजेंसी के गोदाम पर पहुंचा, उपभोक्ताओं के बीच यह सूचना तेजी से फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में लोग गैस रिफिल कराने के लिए एजेंसी कार्यालय पर उमड़ पड़े। ‘पहले मुझे गैस मिले’ की होड़ में लोगों ने सभी काउंटरों को चारों तरफ से घेर लिया, जिससे वहां भारी धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
डिजिटल पेमेंट पर बेतुका तर्क और रसूखदारों को ‘VIP’ ट्रीटमेंट
एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है, जब ऑनलाइन बुकिंग और ऑनलाइन पेमेंट कर चुके उपभोक्ताओं से भी गैस देने के एवज में कार्यालय की ‘मैन्युअल रसीद’ मांगी जाती है।
- कर्मियों का बेतुका जवाब: जब कार्यालय में मौजूद कर्मियों से इस बारे में पूछा गया, तो उनका हैरान करने वाला जवाब था कि “पेमेंट हुआ है या नहीं, यह पुष्ट करने के लिए रसीद देखना जरूरी है।”
- होम डिलीवरी पर बहाना: होम डिलीवरी रोके जाने के सवाल पर कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “लोग खुद ही गैस लेने एजेंसी आ जाते हैं, इसलिए हम होम डिलीवरी नहीं करवा रहे हैं।”
- जान-पहचान वालों को छूट: कतार में लगे आम लोगों का आरोप है कि एक तरफ वे दिन भर धक्के खा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एजेंसी कर्मियों के जान-पहचान वाले और रसूखदार लोग बिना किसी परेशानी के आसानी से गैस सिलेंडर ले जा रहे हैं।
मौन है स्थानीय प्रशासन
आदित्य भारत गैस एजेंसी की इस लचर व्यवस्था और मनमानी के कारण उजियारपुर क्षेत्र के तमाम उपभोक्ताओं का पूरा दिन गैस के इंतज़ाम में बर्बाद हो रहा है। आम जनता परेशान है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन इस पूरी समस्या पर मौन साधे हुए है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस मामले में हस्तक्षेप करता है और आम उपभोक्ताओं को इस धक्का-मुक्की से निजात दिलाकर सुचारू रूप से होम डिलीवरी की व्यवस्था सुनिश्चित कराता है।



