समस्तीपुर में चोरों का तांडव: पत्नी का इलाज कराने गए बुजुर्ग के सूने घर को खंगाला, उजियारपुर पुलिस की सुस्त कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
समस्तीपुर/उजियारपुर: बिहार में सुशासन और चुस्त पुलिस व्यवस्था के दावों के बीच समस्तीपुर जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बेलारी पंचायत के वार्ड नंबर 03 में बेखौफ अपराधियों ने एक बंद घर को अपना निशाना बनाते हुए लाखों की संपत्ति लूट ली। यह घटना न सिर्फ स्थानीय अपराधियों के बढ़े हुए हौसले को दर्शाती है, बल्कि उजियारपुर पुलिस के सुस्त और लापरवाह रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

इलाज के लिए गया था परिवार, पीछे से घर कर दिया साफ
प्राप्त जानकारी और पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, बेलारी निवासी अजीत कुमार झा (स्व. राजेंद्र झा के पुत्र) और उनके पुत्र सोनू झा का परिवार पिछले तीन महीने से घर से बाहर था। अजीत कुमार झा अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए जमशेदपुर (टाटानगर) गए हुए थे। जब वे 13 मई 2026 को सुबह 11:00 बजे अपने घर लौटे, तो उनके होश उड़ गए। घर के उत्तर दिशा का दरवाजा खुला पड़ा था और अंदर पांचों कमरों के ताले टूटे हुए थे। घर का सारा सामान बिखरा हुआ था और पांचों ट्रंक तथा ब्रीफकेस को बेरहमी से तोड़कर लूटपाट की गई थी।
चोरों का छूटा औजार, लेकिन कहाँ है पुलिस?
इस दुस्साहसिक चोरी में अपराधियों ने घर से निम्नलिखित सामानों पर हाथ साफ किया है:
- 1 पानी का पंप
- 1 बैटरी
- 1 इन्वर्टर
- 2 वॉल फैन
- 2 गैस सिलेंडर
- 3 स्टैंड फैन
इसके अलावा टूटे हुए पांचों ट्रंकों में रखे महंगे पीतल और फूल के बर्तन तथा सूटकेस में रखा अन्य कीमती सामान भी गायब है, जिसका पूरा मिलान होना अभी बाकी है। सोनू झा ने बताया कि करीब 4 लाख मूल्य का सामानों की लुटपाट की गई है।
सबसे बड़ी बात यह है कि पीड़ित अजीत कुमार झा ने अपनी शिकायत में स्पष्ट लिखा है कि चोरों का लोहा काटने वाला एक औजार घटनास्थल पर ही छूट गया है। पीड़ित ने पुलिसिया निरीक्षण की उम्मीद में अब तक किसी भी सामान को छुआ तक नहीं है। लेकिन, सवाल यह उठता है कि क्या उजियारपुर पुलिस ने इस अहम सुराग को गंभीरता से लिया? घटनास्थल पर अहम सबूत मौजूद होने के बावजूद पुलिस की ओर से वह तत्परता क्यों नहीं दिख रही है, जिसकी उम्मीद एक आम नागरिक करता है?
स्थानीय मनचलों पर शक, पुलिसिया खौफ शून्य
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों को आशंका है कि इस घटना के पीछे इलाके के ही कुछ स्थानीय लुटेरा प्रवृत्ति के लड़कों का हाथ है। अपराधियों को भली-भांति पता था कि परिवार लंबे समय से बाहर है। यह बिना रेकी और स्थानीय जानकारी के संभव नहीं है।
पुलिसिया रवैये पर उठते सुलगते सवाल:
- क्या उजियारपुर पुलिस का खुफिया तंत्र इतना कमजोर हो चुका है कि इलाके में सक्रिय असामाजिक तत्वों की भनक उन्हें नहीं लग पाती?
- घटनास्थल पर चोरों के औजार (सबूत) मौजूद होने के बावजूद, पुलिस अपराधियों की गिरेबान तक पहुँचने में इतनी सुस्त क्यों है?
- एक बुजुर्ग जो अपनी पत्नी के इलाज की जद्दोजहद से लौट कर आता है, उसे अपनी गाढ़ी कमाई लुटने का सदमा लगता है; क्या पुलिस के पास ऐसे पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की कोई ठोस कार्ययोजना है?
उजियारपुर पुलिस की इस कार्यशैली से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। अगर समय रहते पुलिस ने उचित और कड़ी कार्रवाई करते हुए इन अज्ञात लुटेरों को गिरफ्तार नहीं किया, तो इलाके में अपराधियों का मनोबल और भी बढ़ जाएगा। अब देखना यह है कि सो रही पुलिस कब जागती है और सोनू झा के परिवार को कब न्याय मिल पाता है।



