समस्तीपुर नाजीरपुर विवाद: डीएसपी के.के. दिवाकर का बड़ा खुलासा- ‘ट्रक में कुछ नहीं मिला, इसलिए भड़के लोग’, मनमानी गिरफ्तारी पर दिया यह जवाब
समस्तीपुर: उजियारपुर थाना क्षेत्र के नाजीरपुर गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए हाई-वोल्टेज विवाद मामले में जांच तेज हो गई है। समस्तीपुर पुलिस मुख्यालय के डीएसपी (DSP) के.के. दिवाकर ने खुद दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की गहन जांच की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों, मुखिया और जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया और मीडिया के सामने घटना की असली वजह का खुलासा किया।

ट्रक की तलाशी बनी विवाद की जड़
घटना की सिलसिलेवार जानकारी देते हुए डीएसपी के.के. दिवाकर ने बताया कि उजियारपुर थाना कांड संख्या 323/26 की जांच के लिए पुलिस टीम नाजीरपुर पहुंची थी। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि घटना वाली रात एक ट्रक जा रहा था, जिसके पीछे प्रशासन (थाने) की गाड़ी थी। पुलिस को शक हुआ कि उस ट्रक में कुछ अवैध या आपत्तिजनक सामान हो सकता है। इसी शक के आधार पर पुलिस ने ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली। हालांकि, छानबीन के दौरान ट्रक में कोई भी अवैध या आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ।
‘कुछ नहीं मिला, तो पुलिस ने चेक क्यों किया?’ – इसी पर उग्र हुए लोग
डीएसपी ने बताया कि जब ट्रक से कुछ बरामद नहीं हुआ, तो वहां मौजूद स्थानीय लोग थोड़े उग्र हो गए। ग्रामीणों का सवाल था कि “जब ट्रक में कुछ था ही नहीं, तो पुलिस ने चेकिंग क्यों की?” इसी बहस और पूछताछ के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई और धीरे-धीरे बात काफी बढ़ गई। डीएसपी ने आश्वासन दिया है कि पुलिस सभी पहलुओं को देख रही है और जांच के बाद जो भी सही तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा।
25-30 अज्ञात लोगों पर FIR: क्या गांव वालों को मनमानी गिरफ्तारी का डर है?
इस मामले में 25-30 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) से गांव में फैले दहशत और गिरफ्तारी के डर पर भी डीएसपी ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी।
उन्होंने स्पष्ट किया, “अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज होना पुलिस अनुसंधान (जांच) का एक सामान्य विषय है। अज्ञात में मामला इसलिए दर्ज किया जाता है ताकि जांच के दौरान हम असली दोषी व्यक्ति तक पहुंच सकें।”
ग्रामीणों के मनमानी गिरफ्तारी के डर को दूर करते हुए डीएसपी ने कड़े शब्दों में कहा, “इसका यह कतई मतलब नहीं है कि पुलिस जिसका मन करेगा, उसे गिरफ्तार कर लेगी। यह पूरी तरह से जांच का बिंदु है। जब जांच में यह साफ हो जाएगा कि असली दोषी कौन है, उसके बाद ही नियम के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
आगे क्या?
डीएसपी के.के. दिवाकर के इस बयान से नाजीरपुर के ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिली है कि निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि पुलिस की यह जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस पूरे विवाद में असली दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।



