बिहार में विधायकों की पेंशन पर RTI का बड़ा खुलासा: एक कार्यकाल के बाद 61 हज़ार रुपये मासिक पेंशन, लेकिन कुल खर्च का कोई आंकड़ा नहीं
मुंगेर के एक आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई सूचना के जवाब में बिहार विधानसभा सचिवालय ने विधायकों और पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े कई अहम तथ्य साझा किए हैं।

एक कार्यकाल (5 वर्ष) पूरा करने पर 61,000 रुपये पेंशन
मुंगेर जिले के धरहरा (उत्तर टोला) निवासी श्याम मुरारी प्रसाद ने 22 जुलाई 2026 को आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत बिहार विधानसभा सचिवालय से विधायकों की पेंशन को लेकर जानकारी मांगी थी। 20 अगस्त 2026 को तैयार किए गए जवाब (पत्रांक-2809) में सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि बिहार में एक कार्यकाल (5 साल) पूरा करने वाले पूर्व विधायकों को प्रतिमाह 61,000/- (एकसठ हजार) रुपये सदस्य पेंशन के रूप में देय है।
पेंशन पर होने वाले कुल खर्च का आंकड़ा विधानसभा के पास नहीं
आवेदक ने अपने दूसरे सवाल में वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 तक पूर्व विधायकों और विधान पार्षदों की पेंशन एवं सुविधाओं पर हुए कुल व्यय का वर्षवार आंकड़ा मांगा था। इसके जवाब में विधानसभा सचिवालय की पेंशन शाखा ने बताया है कि इस वार्षिक व्यय से संबंधित जानकारी या आंकड़ा उनके पास उपलब्ध नहीं रहती है।
पेंशन खत्म करने या संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं
जब आवेदक ने यह जानना चाहा कि क्या बिहार सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार द्वारा विधायकों की आजीवन पेंशन व्यवस्था को समाप्त करने या संशोधन करने का कोई प्रस्ताव है, तो सचिवालय ने जवाब दिया कि पेंशन शाखा को ऐसा कोई प्रस्ताव या पत्राचार प्राप्त नहीं हुआ है।
जवाब में यह भी रेखांकित किया गया है कि पेंशन नियमावली में समय-समय पर संशोधन करने का अधिकार केवल ‘राज्य सरकार’ को है, इसमें विधानसभा सचिवालय की कोई भूमिका नहीं होती है। यह आधिकारिक जानकारी बिहार विधानसभा के अवर सचिव-सह-लोक सूचना पदाधिकारी द्वारा 2 सितंबर 2026 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदक को भेजी गई है।
विधायकों से आधी है सांसदों की पेंशन, ‘वन नेशन वन पेंशन’ का कोई प्रस्ताव नहीं
विधायकों की पेंशन के साथ-साथ लोकसभा सचिवालय (पत्रांक 1(1247)/RTI/26, दिनांक 27.08.2026) ने भी पूर्व सांसदों की पेंशन से जुड़े अहम आंकड़े साझा किए हैं। सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, “संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954” के तहत 1 अप्रैल 2023 से पूर्व सांसदों को ₹31,000 मासिक पेंशन दी जाती है। वहीं, अगर किसी सांसद का कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक होता है, तो उन्हें हर अतिरिक्त वर्ष के लिए ₹2,500 की अतिरिक्त राशि दी जाती है।
हालांकि, विधायकों की तरह सांसदों की पेंशन पर हुए कुल खर्च का भी स्पष्ट आंकड़ा तत्काल नहीं मिल सका है। लोकसभा सचिवालय ने बताया है कि वर्ष 2019 से 2025 तक पेंशन पर हुए कुल खर्च का ब्योरा वित्त मंत्रालय के पास होता है, जहां से अभी उत्तर की प्रतीक्षा की जा रही है। साथ ही, सचिवालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनके रिकॉर्ड में “वन नेशन वन पेंशन” (One Nation One Pension) लागू करने जैसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इन खुलासों के बाद आरटीआई आवेदक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जनता का पैसा कहाँ जाता है, यह जानना हमारा अधिकार है। मैं वित्त मंत्रालय और राज्यसभा से उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। आगे की जानकारी मिलते ही उसे भी सार्वजनिक करूँगा।”



