रेलवे स्टेशनों पर लूट: यात्रियों की जेब और सेहत से खुलेआम खिलवाड़, पक्के सबूतों के बावजूद सिर्फ नाममात्र का जुर्माना
भारतीय रेलवे: पूर्वी रेलवे के मालदा मंडल के अधीन आने वाले भागलपुर जंक्शन पर रेलवे यात्रियों की जेब और सेहत दोनों के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर अनधिकृत पानी की बोतलों के सैकड़ों पैकेट खुलेआम स्टॉक में रखे गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, यही अनधिकृत पानी 15658 कामाख्या–दिल्ली ब्रह्मपुत्र मेल में यात्रियों को 20 रुपये के तय मूल्य के बजाय 25 से 30 रुपये में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।

यात्रियों का आरोप है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई या जाँच नहीं होती है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस मनमानी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है—IRCTC के वेंडर, रेलवे का स्टाफ या फिर रेलवे सुरक्षा बल (RPF)?
सिस्टम की इस लापरवाही और खानापूर्ति का एक पुख्ता मामला सामने आया है। RTI कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक (दिव्यांगजन) श्याम मुरारी प्रसाद ने यात्रा के दौरान कामाख्या जंक्शन पर ओवरचार्जिंग को लेकर आवाज़ उठाई। उन्होंने 21 अक्टूबर 2026 को कामाख्या जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर स्थित ‘S.S Enterprises’ द्वारा 40 रुपये की MRP वाली कोल्ड ड्रिंक पर ज्यादा पैसे वसूलने के खिलाफ ‘RailMadad’ पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।
इस शिकायत पर हुई कार्रवाई का साक्ष्य स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस आधिकारिक मेमो के अनुसार, S.S. Enterprises पर रेलमदद शिकायत के आधार पर कोल्ड ड्रिंक पर ओवरचार्जिंग करने के लिए 1000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह मेमो 21/10/2026 को जारी किया गया है और इसमें उल्लेख है कि यह कार्रवाई ACM/GHY के आदेशानुसार की गई है। साथ ही, जुर्माने के तौर पर 1000 रुपये जमा करने की आधिकारिक रसीद (M/R NO. 51919492) भी संलग्न है।
आरटीआई कार्यकर्ता श्याम मुरारी जी का आरोप है कि इतने पक्के सबूत होने के बावजूद रेलवे प्रशासन सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रहा है। IRCTC के स्पष्ट नियम हैं कि तय रेट से ज्यादा पैसे लेना एक गंभीर उल्लंघन है। वेंडरों के लिए मेनू कार्ड रखना अनिवार्य है और बिल प्राप्त करना यात्री का अधिकार है। नियमों के अनुसार दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना और वेंडर का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है। पूर्व में रेलवे अपनी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा चुका है। लेकिन इस मामले में स्टेशन अधीक्षक कार्यालय के बिल्कुल पास होने के बावजूद महज़ 1000 रुपये का जुर्माना लगाना, वेंडरों को मिल रहे अघोषित संरक्षण की ओर इशारा करता है।
शिकायतकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद का कहना है कि “पारदर्शिता से विधिव्यवस्था काँपती है, लेकिन अब जनता जागरूक हो गई है और यह मनमानी नहीं चलेगी।” उनका स्पष्ट मानना है कि इतनी शिकायतों और सबूतों के बावजूद जब प्रशासन उचित कार्रवाई नहीं कर रहा है, तो अब उनके पास न्यायिक प्रक्रिया का ही रास्ता बचा है। भागलपुर की जनता और यात्री अब रेलवे प्रशासन से इस पूरे गोरखधंधे की एक पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच की मांग कर रहे हैं।




