मालदा डिवीजन के अंतर्गत आने वाले महरना-धरहरा अंडरब्रिज (20 नंबर गुमटी) पर जल निकासी व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ‘जनहित अभियान’ के श्याम मुरारी ने रेलवे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। उनका दावा है कि अंडरब्रिज पर लगाए गए वाटर मोटरों की खरीद और स्थापना में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं।

श्याम मुरारी के अनुसार, जब जनता ने अधिकारियों से मोटरों के बारे में सीधा सवाल किया, तो एईएन (AEN) का अनौपचारिक जवाब बेहद चौंकाने वाला था। एईएन ने कहा, “मेरे हिसाब से दो होगा… बाद में तीन मोटर लगा है, जिसमें से दो 4-4 HP का और एक 3 HP का है।” हालांकि, लिखित उत्तर में भी तीन मोटर लगने की पुष्टि की गई है। लेकिन जब पूरी आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी मांगी गई, तो एईएन ने पल्ला झाड़ते हुए इसे ‘आईओडब्ल्यू’ (IOW) के स्तर का काम बता दिया।
विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि एक ऑडियो साक्ष्य से इस पूरे मामले की कलई खुल गई है। इस कार्य में तीन मुख्य तकनीकी और प्रक्रियात्मक कमियां सामने आई हैं: इस पूरे काम का कोई ‘मेज़रमेंट बुक’ (MB) पास नहीं हुआ है। इन मोटरों को किसी निर्धारित (Dedicated) जगह के लिए आवंटित नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें ‘सप्लाई आइटम’ के अंतर्गत दिखाया गया है। ये मोटरें सीधे किसी एजेंसी द्वारा प्रदान की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर रंजीत राम नामक व्यक्ति को आईओडब्ल्यू द्वारा यह कहकर काम पर रखा गया कि, “तुम चलवाना है, हम पैसा देंगे,” जो पूरी तरह से अनौपचारिक और संदिग्ध प्रक्रिया की ओर इशारा करता है।
श्याम मुरारी ने इसे जनता के टैक्स और खून-पसीने की कमाई का मामला बताते हुए ‘कागज दिखाओ’ की मांग की है। उन्होंने मालदा डिवीजन के रेल प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर लिखित और सार्वजनिक जवाब मांगा है: तीनों मोटरों की खरीद प्रक्रिया, उनकी क्षमता (HP), MB और फंड सोर्स की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। सप्लाई आइटम’ को एक डेडिकेटेड कार्य (जल निकासी) में लगाने की आधिकारिक स्वीकृति दिखाई जाए। आईओडब्ल्यू के स्तर पर हुई नियुक्ति और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाए।
जनहित अभियान की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि रेलवे प्रशासन ने इन सवालों के पारदर्शी जवाब नहीं दिए, तो इस मामले को मीडिया में प्रमुखता से उठाया जाएगा। “पारदर्शिता से काँपती है व्यवस्था, जाग चुकी है जनता” के नारे के साथ अब स्थानीय लोग भी रेल प्रशासन से जवाब की उम्मीद कर रहे हैं।



