उजियारपुर: 12 दिनों से नल-जल योजना ठप, पानी को तरसे ग्रामीण; भाकपा माले ने किया पीएचईडी एसडीओ का पुतला दहन
उजियारपुर प्रखंड के विरनामातुला पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 02 (सुपौल गांव) में पिछले 12 दिनों से नल-जल योजना के ठप रहने से पूरे इलाके में जलापूर्ति पूरी तरह से बाधित है। दिवाली जैसे महत्वपूर्ण पर्व के मौके पर पानी न मिलने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शनिवार को पानी की किल्लत और विभागीय लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने भाकपा माले के नेतृत्व में उजियारपुर पीएचईडी इंजीनियर के खिलाफ दलसिंहसराय एसडीओ का पुतला दहन किया।

वार्ड नंबर 2 के ‘तीन बटिया’ पर आयोजित इस पुतला दहन के बाद एक प्रतिरोध सभा का भी आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता शाखा सचिव राम चन्द्र राय ने की।
‘ड्रीम प्रोजेक्ट हो रहा ध्वस्त, फोन तक नहीं उठाते अधिकारी’
प्रतिरोध सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के वरीय नेता महावीर पोद्दार ने प्रशासन और मौजूदा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नल-जल योजना’ को मौजूदा भाजपा-सम्राट चौधरी की सरकार में पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है।
पोद्दार ने कहा, “दिवाली जैसे बड़े पर्व पर भी नल-जल योजना ठप है। पानी के बिना साफ-सफाई तो दूर, लोगों के सामने पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। मजबूरन इस वार्ड के लोगों को बगल की केवस निजामत पंचायत से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।” उन्होंने अधिकारियों पर भ्रष्ट और लापरवाह होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 12 दिन बीत जाने के बाद भी उजियारपुर के जेई (JE) और एसडीओ ग्रामीणों का फोन तक रिसीव नहीं करते हैं।
मांगे पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन सड़क जाम की चेतावनी
भाकपा माले नेता ने प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अविलंब जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो दिवाली के बाद समस्तीपुर-रोसड़ा स्टेट हाईवे (SH-55) को केवस भट्ठी चौक पर अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिया जाएगा। इस जाम और विधि-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी उजियारपुर जेई और एसडीओ की होगी।
आंदोलन में ये लोग रहे शामिल:
इस विरोध प्रदर्शन और प्रतिरोध सभा में मुख्य रूप से उमेश कुमार राय, शिवचन्द्र राय, चन्द्रदीप पासवान, वीणा देवी, सुनीता देवी, शिव देवी, रीता देवी, मुकेश राय, महेश साह, मनटून साह, कैलाश साह, पिन्टू कुमार, संतोष साह, अर्जुन पासवान और शशि कपूर सहित दर्जनों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल थे।




