श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट: गृह मंत्रालय के “शून्य” जवाब पर RTI कार्यकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर गृह मंत्रालय के एक ताज़ा आरटीआई (RTI) जवाब ने विवाद खड़ा कर दिया है। मुंगेर के धरहरा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में मंत्रालय ने पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि ट्रस्ट पर सरकार का कोई वित्तीय या प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है, इसलिए मांगी गई जानकारी “शून्य” (NIL) मानी जाए। इस जवाब से असंतुष्ट कार्यकर्ता ने इसे आरटीआई अधिनियम, 2005 का उल्लंघन बताते हुए प्रथम अपील दायर करने की घोषणा की है।

आरटीआई में क्या पूछा गया था?
श्याम मुरारी प्रसाद ने 21 अगस्त 2026 को गृह मंत्रालय (RTI No. MHOME/R/E/26/06669) में एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया था। इसमें उन्होंने मुख्य रूप से पांच सवाल पूछे थे:
- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सरकार ने कैसे किया?
- ट्रस्ट को कितनी ज़मीन आवंटित की गई?
- साल 2020 से अब तक सरकार द्वारा ट्रस्ट को कितनी धनराशि दी गई है?
- ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट कहाँ उपलब्ध है?
- ट्रस्ट को मिले 80G स्टेटस (आयकर छूट) की वर्तमान स्थिति क्या है?
गृह मंत्रालय का गोलमोल जवाब
15 सितंबर 2026 को गृह मंत्रालय के जेकेएल प्रभाग/अयोध्या अनुभाग (संख्या: 71020/10/2026-एवाई) की केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) एलिस आर टेटे द्वारा इस आरटीआई का जवाब भेजा गया। जवाब में कहा गया, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त संगठन/निकाय है। केंद्र सरकार का श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यों या उसकी किसी भी गतिविधि में कोई वित्तीय या प्रशासनिक हिस्सेदारी/नियंत्रण नहीं है।” पत्र के अंत में स्पष्ट किया गया, “अतः आपके द्वारा माँगे गए अभिलेख/सूचना अधोहस्ताक्षरी सीपीआईओ के पास उपलब्ध नहीं है। इसलिए सूचना को ‘शून्य’ (NIL) माना जा सकता है।”
आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए तीखे सवाल
गृह मंत्रालय के इस जवाब पर सख्त ऐतराज़ जताते हुए श्याम मुरारी प्रसाद ने कई वाजिब और तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा, “अगर सरकार का ट्रस्ट से कोई लेना-देना ही नहीं है, तो:
- ट्रस्ट का गठन भारत सरकार की अधिसूचना (दिनांक 05-02-2020) के माध्यम से कैसे हुआ?
- उत्तर प्रदेश सरकार ने किस आदेश या प्रक्रिया के तहत ट्रस्ट को 67.703 एकड़ भूमि आवंटित की?
- अयोध्या विवाद पर सालों तक सुप्रीम कोर्ट में चला ऐतिहासिक मुकदमा आखिर किसके नाम पर लड़ा गया था?”
RTI अधिनियम के उल्लंघन का आरोप
श्याम मुरारी प्रसाद ने आरोप लगाया है कि यह जवाब देना आरटीआई अधिनियम 2005 का घोर उल्लंघन है। उनका तर्क है कि यदि गृह मंत्रालय के पास सीधे तौर पर जानकारी उपलब्ध नहीं थी, तो धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभाग (जैसे कि वित्त मंत्रालय या अन्य संबंधित मंत्रालय) को ट्रांसफर किया जाना चाहिए था, न कि सीधे “NIL” लिखकर पल्ला झाड़ लेना चाहिए था।
प्रथम अपील की तैयारी
इस असंतोषजनक जवाब के खिलाफ श्याम मुरारी प्रसाद ने 30 दिनों के भीतर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (श्री प्रशांत लोखंडे, संयुक्त सचिव, जेकेएल, गृह मंत्रालय) के समक्ष अपील दायर करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “जनता को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर स्पष्ट और पारदर्शी जवाब चाहिए। सरकार इस तरह से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।”
यह मामला एक बार फिर आरटीआई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के अहम सवाल उठाता है, खासकर तब जब मामला देश के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील ट्रस्ट से जुड़ा हो। अब देखना यह होगा कि प्रथम अपील में गृह मंत्रालय क्या रुख अपनाता है।



