समस्तीपुर के उजियारपुर में वाहा उड़ाही के नाम पर भारी भ्रष्टाचार: कागजों पर काम पूरा, जमीन से वाहा गायब
बिहार के समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत पतैली पश्चिमी पंचायत में ‘वाहा उड़ाही’ (नालों की सफाई/खुदाई) कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी कागजों पर यह योजना पूरी हो चुकी है और लाखों रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, लेकिन हकीकत में जमीन पर वाहा का नामोनिशान तक नहीं है।
यह कार्य उजियारपुर ब्लॉक की पतैली पश्चिमी पंचायत के वार्ड 04 में “विनय कुमार के खेत से नरेश कुमार के खेत तक वाहा उड़ाही कार्य” के नाम से स्वीकृत किया गया था। एसेट रजिस्टर की जानकारी के मुताबिक, इस योजना की कुल अनुमानित लागत 4.549 लाख रुपये थी। हैरत की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस कार्य को पूरा (Completed) दिखाया गया है और अकुशल श्रमिकों के वेतन के मद में 3,13,060 रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च भी की जा चुकी है।
29 जनवरी को शुरू हुआ काम, लेकिन 9 जनवरी से ही निकाल लिए गए मजदूरों के पैसे!

इस पूरे वाहा उड़ाही घोटाले में सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल से एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध मस्टर रोल और एसेट रजिस्टर के आंकड़ों में भारी विरोधाभास है, जो कागजी हेराफेरी की पोल खोल रहा है। एसेट रजिस्टर के अनुसार, योजना का कार्य 29 जनवरी 2025 को शुरू (Work Start Date) दिखाया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मस्टर रोल संख्या 14343 के जरिए 9 जनवरी से 24 जनवरी 2025 तक की अवधि के लिए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर उन्हें भुगतान भी कर दिया गया है।

यानी जिस काम की आधिकारिक शुरुआत 29 जनवरी को हुई, उसके लिए 20 दिन पहले से ही मजदूरों की फर्जी हाजिरी बनाकर पैसों की निकासी कर ली गई। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बिना कोई वास्तविक कार्य कराए, केवल सरकारी खजाने को लूटने के लिए पिछली तारीखों में फर्जी मस्टर रोल तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, एसेट रजिस्टर में कार्य से जुड़ी एक भी तस्वीर अपलोड न होना, इस धांधली की पुष्टि करता है।
पहले से मौजूद वाहा में साफ सफाई कराकर खेत में मिला दी गई वाहा

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि महज सरकारी पैसा निकालने की नीयत से निजी जमीन में सड़क किनारे पहले से मौजूद वाहा में जंगल साफ कर थोड़ी बहुत खुदाई कर दी गई थी। भ्रष्टाचार और धांधली की हद तो तब हो गई, जब योजना का पूरा पेमेंट हो जाने के बाद, जिस व्यक्ति की जमीन में यह वाहा खोदा गया था, उसने पूरी वाहा को ट्रैक्टर से जोत कर वापस खेत में मिला लिया। सरकारी पोर्टल के एसेट रजिस्टर में भी भारी अनियमितता उजागर हुई है, जहां कार्य शुरू होने से पहले, कार्य के दौरान और कार्य पूर्ण होने की कोई भी तस्वीर (Photo Not Available) अपलोड नहीं की गई है।
पीएमओ पोर्टल पर शिकायत और अधिकारियों की जांच
इस पूरे फर्जीवाड़े की भनक लगते ही स्थानीय ग्रामीण दिनेश कुमार सहनी ने 30 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पोर्टल पर इसकी लिखित शिकायत दर्ज करा दी। इस शिकायत के आधार पर आज, 18 सितंबर 2026 को समस्तीपुर डीआरडीए (DRDA) से एई (AE) सुधांशु कुमार और उजियारपुर के जेई (JE) सचिन कुमार जांच करने के लिए वाहा वाले स्थल पर पहुंचे।
सवालों से बचते नजर आए अधिकारी

जांच के दौरान जब अधिकारियों से मौके से गायब वाहा और इस घोटाले पर कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे जवाब देने से कतराते नजर आए। एई सुधांशु कुमार ने स्पष्ट रूप से कुछ भी बोलने से बचते हुए केवल “नो कमेंट्स” कहा और अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गए।

वहीं, जब जेई सचिन कुमार से पूछा गया कि “सर, वाहा तो एस्टीमेट के अनुसार उड़ाही नहीं गई है,” तो उन्होंने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि वह इस बारे में अपने वरीय अधिकारी को जवाब देंगे। अब पूरे इलाके के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पीएमओ पोर्टल पर हुई शिकायत और अधिकारियों के इस निरीक्षण के बाद इस खुले भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।



