दैनिक भास्कर के पत्रकार पर जेन जी आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का आरोप, उजियारपुर में पुलिस की मैराथन पूछताछ
पटना में हाल ही में संपन्न हुए ‘जेन जी आंदोलन’ को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। इस आंदोलन को लेकर डिजिटल मीडिया पर चलाई गई एक कथित “खुफिया रिपोर्ट” के बाद उजियारपुर प्रखंड के महेशपट्टी में पुलिस और प्रशासन का भारी जमावड़ा देखने को मिला। वामपंथी नेताओं ने इस पूरी घटना को जेन जी आंदोलन को कुचलने और बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

“पत्रकार ने रची आंदोलन को बदनाम करने की साजिश”
भाकपा-माले के जिला स्थायी कमेटी सदस्य फूलबाबू सिंह ने आरोप लगाया है कि दैनिक भास्कर के खुफिया कैमरे की आड़ में पटना के एक पत्रकार ने जेन जी आंदोलन को बदनाम करने की गहरी साजिश रची है। वहीं, नेता ललन कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उक्त खुफिया पत्रकार ‘भाजपा के एजेंट’ के रूप में काम कर रहा है।
नेताओं के अनुसार, 6 सितंबर को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित जेन जी आंदोलन में उजियारपुर प्रखंड के महेशपट्टी स्थित एक निजी कोचिंग सेंटर के छात्रों ने भी हिस्सा लिया था। आरोप है कि इसके बाद पत्रकार द्वारा डिजिटल मीडिया पर यह भ्रामक खबर फैलाई गई कि इस कोचिंग सेंटर में छात्रों का सरकार के खिलाफ ‘ब्रेनवॉश’ किया जा रहा है।
उन्हें पैसे देकर आंदोलन में भेजा जाता है, और यदि सरकार आंदोलनकारियों पर सख्ती करती है, तो ये बच्चे हमला भी कर देंगे। इस मनगढ़ंत खबर के जरिए कोचिंग सेंटर के संचालक और आइसा-आरवाईए (AISA-RYA) के स्थानीय नेता रोहित और राहुल को मुख्य रूप से टारगेट किया गया।
एसपी ने छात्रों और संचालकों से की पूछताछ
सरकार और प्रशासन इस जेन जी आंदोलन से जुड़ी खुफिया रिपोर्ट्स को लेकर पहले से ही सतर्क थे। इसी भ्रामक खबर और इनपुट के आधार पर, 15 सितंबर की शाम करीब 5 बजे समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) अरविंद प्रताप सिंह महेशपट्टी स्थित उक्त कोचिंग सेंटर पहुंचे।
एसपी ने वहां मौजूद बच्चों से लंबी बातचीत कर वस्तुस्थिति को समझने का प्रयास किया। इसके बाद कोचिंग संचालक रोहित और राहुल को थाने ले जाकर पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद एसपी ने उन्हें ऐसी भ्रामक खबरें फैलाने वालों से सावधान रहने की नसीहत दी।
स्थानीय नेता फुलबाबू सिंह के अनुसार रात 10 बजे पर्सनल बॉन्ड पर रिहाई
स्थानीय नेता फुलबाबू सिंह के अनुसार एसपी की पूछताछ के बाद, दलसिंहसराय के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) विवेक कुमार शर्मा और पुलिस निरीक्षक पिंकी प्रसाद ने भी दोनों छात्र-युवा नेताओं (रोहित और राहुल) से मैराथन पूछताछ की। घंटों चली इस पूछताछ के बाद अंततः रात करीब 10 बजे दोनों को पर्सनल बॉन्ड (Personal Bond) भरवाकर घर जाने की इजाजत दे दी गई।
पुलिस का पक्ष: स्वतः संज्ञान लेकर हुई कार्रवाई, 3-4 लोगों पर FIR दर्ज
इस पूरे मामले पर पुलिस का रुख जानने के लिए जब उजियारपुर थाने के प्रभारी SHO सह सब-इंस्पेक्टर (SI) प्रकाश चंद्र राज से फोन पर बातचीत की गई, तो उन्होंने एक अलग ही पहलू सामने रखा। एसआई ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने किसी बाहरी इनपुट नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है।
उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो में जो व्यक्ति दिख रहे थे, उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके साथ ही वीडियो में नजर आ रहे कुल 3 से 4 व्यक्तियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है। एसआई के अनुसार, पकड़े गए लोगों को इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे भविष्य में पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
वामपंथी और छात्र नेताओं का जमावड़ा
इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई के दौरान थाने और मौके पर भाकपा-माले और छात्र संगठनों के नेताओं की भारी भीड़ मौजूद रही। पुलिस पदाधिकारियों ने हालात को संभालते हुए मौके पर उपस्थित भाकपा-माले के जिला स्थायी कमेटी सदस्य फूलबाबू सिंह, ललन कुमार, गंगा प्रसाद पासवान, अर्जुन दास, संजीत पंडित और मो० सकूर के साथ बातचीत की।
इसके साथ ही, प्रशासन ने वहां मौजूद छात्र-युवा नेताओं दीपक यदुवंशी, मो० फैज, उदय कुमार, तीलो सदा और मधुकर कुमार से भी संवाद कर स्थिति को स्पष्ट किया। फिलहाल क्षेत्र में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।



