RTI खुलासा: बुजुर्ग को ₹1,100, किसान को ₹500 और पूर्व विधायक को ₹61,000 पेंशन; बिहार पूछ रहा है आखिर क्यों?
बिहार में गरीबी और सरकारी खजाने के वितरण का एक चौंकाने वाला सच आरटीआई (RTI) से सामने आया है। मुंगेर के धरहरा निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद द्वारा प्राप्त ताजा दस्तावेजों ने राज्य की पेंशन व्यवस्था की गहरी खाई को उजागर कर दिया है।
नीति आयोग के अनुसार जहाँ बिहार की लगभग 51.91% आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, वहीं राजनेताओं और आम जनता को मिलने वाली आर्थिक सहायता के बीच का यह भारी अंतर हर गाँव में आक्रोश पैदा कर रहा है।

व्यवस्था की तीन अलग-अलग तस्वीरें:
- जनता की पेंशन: राज्य में विधवा, दिव्यांग और बुजुर्गों को मात्र ₹1,100 प्रति माह मिलते हैं। (21 जून 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा ₹400 से बढ़ाकर इसे जुलाई से लागू किया गया था)।
- किसानों की मदद: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को सालाना ₹6,000 (केंद्र सरकार द्वारा) मिलते हैं। यानी खेती करने वाले अन्नदाता के हिस्से में मात्र ₹500 महीना आता है।
- नेताओं की पेंशन (RTI खुलासा): 20 अगस्त 2026 को मिले RTI जवाब के अनुसार, बिहार में मात्र एक कार्यकाल (5 साल) विधायक रहने पर नेताओं को आजीवन ₹61,000 प्रति माह पेंशन मिलती है। वहीं, लोकसभा सचिवालय (27 अगस्त 2026 के जवाब) के अनुसार पूर्व सांसदों की पेंशन ₹31,000 (1 अप्रैल 2023 से) है। हैरानी की बात यह है कि विधानसभा सचिवालय के पास 2018 से 2025 तक विधायक पेंशन पर हुए कुल खर्च का कोई रिकॉर्ड ‘उपलब्ध नहीं’ है और न ही इस आजीवन पेंशन को खत्म करने का कोई प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
आंकड़ों में असमानता की खाई:
यह आंकड़े साबित करते हैं कि एक पूर्व विधायक की पेंशन एक बेसहारा बुजुर्ग की पेंशन से 55 गुना (61,000 ÷ 1,100) और एक किसान की मासिक आर्थिक मदद से 122 गुना (61,000 ÷ 500) अधिक है। यहाँ तक कि पूर्व सांसदों (₹31,000) के मुकाबले बिहार के पूर्व विधायकों को दोगुनी पेंशन मिल रही है।
सड़कों और गाँवों से उठते तीखे सवाल:
जब एक किसान को साल भर में मात्र ₹6,000 मिलते हैं और माताओं-बहनों को ₹1,100, तो जनता के ही टैक्स से 5 साल की सेवा के बदले नेताओं को आजीवन ₹61,000 क्यों दिए जा रहे हैं? इस व्यवस्था के खिलाफ स्पष्ट मांगें रखी गई हैं:
- नियम में संशोधन: बिहार विधान मंडल पेंशन नियमावली 2006 में संशोधन हो और ‘One Nation, One Pension’ का सिद्धांत लागू किया जाए।
- पेंशन सीमा: पूर्व विधायकों की पेंशन की अधिकतम सीमा सांसद पेंशन के बराबर तय हो।
- पारदर्शिता: 2018-2025 तक विधायकों की पेंशन पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक हो; RTI में ‘उपलब्ध नहीं’ जैसा गैर-जिम्मेदाराना जवाब नहीं चलेगा।
- महंगाई से जुड़ाव: जिस तरह नेताओं की पेंशन बढ़ती है, उसी तरह किसान और सामाजिक पेंशन को भी महंगाई दर से जोड़ा जाए।
यह मुहिम किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ है जो असमानता को बढ़ावा देती है। पारदर्शिता से ही सत्ता व्यवस्था जवाबदेह बनती है — और यही RTI की असली ताकत है। जनता जागेगी, तभी हिसाब मिलेगा।



