समस्तीपुर: श्मशान घाट की जमीन पर पंचायत भवन निर्माण के विरोध में मुखिया ने कलेक्ट्रेट में किया आत्मदाह का प्रयास, डीएम पर लगाए गंभीर आरोप
समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड की बाजिदपुर मेयारी पंचायत के वर्तमान मुखिया बिरजू राय ने सोमवार को समाहरणालय परिसर में आत्मदाह करने का प्रयास किया। कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मुखिया ने अपने ऊपर डीजल डाल लिया और आग लगाने की कोशिश की।

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें रोक लिया और उनके हाथ से डीजल की बोतल तथा माचिस छीन ली, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद पुलिस ने मुखिया को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर पूछताछ शुरू कर दी है।
भ्रष्टाचार और डीएम पर अनदेखी के गंभीर आरोप
मुखिया बिरजू राय ने आरोप लगाया है कि उनकी पंचायत में श्मशान की जमीन पर पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया जा रहा है और इसके लिए उन्होंने समस्तीपुर के जिलाधिकारी सहित सभी संबंधित पदाधिकारियों को लगातार आवेदन दिया था। उनका कहना है कि जब धरातल पर एक ईंट भी नहीं लगी थी, तब एसडीएम कार्यालय से यह रिपोर्ट निकल गई कि फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है।
उन्होंने बताया कि जब फाउंडेशन पूरा होने की बात आती है, तो साठ से सत्तर लाख रुपये का मामला सामने आता है। मुखिया ने जिलाधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे खुद सभी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर जिला चला रहे हैं और उनके द्वारा न्याय नहीं किए जाने के कारण ही वे हताश होकर आत्मदाह करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
पंचायत के अधिकारों का हनन और कार्रवाई की मांग
अपनी निराशा व्यक्त करते हुए मुखिया ने कहा कि देश में केंद्र, राज्य और पंचायत स्तर की तीन सरकारें होती हैं, लेकिन पंचायत सरकार के सारे अधिकार छीने जा रहे हैं। एक चुनी हुई पंचायत सरकार को अधिकारियों द्वारा दबाया जा रहा है और बार-बार आवेदन देने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया।
उन्होंने कड़े शब्दों में मांग की है कि ऐसे जिलाधिकारी का पद पर बने रहना उचित नहीं है और सरकार को उन पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने श्मशान घाट पर हो रहे निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराकर काम रोकने की भी मांग की है।
पूर्व में कई बड़े अधिकारियों से की जा चुकी थी शिकायत
इस आत्मघाती कदम को उठाने से पहले मुखिया ने अपनी शिकायतों को लेकर कई स्तरों पर गुहार लगाई थी। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के बाद 28 सितंबर 2026 को उन्होंने पटना जाकर बिहार सरकार के मुख्य सचिव को साक्ष्यों के साथ ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद 10 अक्टूबर 2026 को उन्होंने राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, उपमुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर हस्तक्षेप की मांग की थी। लगातार शिकायत करने के बावजूद जब निर्माण कार्य जारी रहा और किसी ने उनकी सुध नहीं ली, तो उन्होंने चेतावनी देने के बाद यह कदम उठाया।




