बिहार के सरकारी स्कूलों में ‘लाइव क्लास’ शुरू, सीएम सम्राट चौधरी की बड़ी सौगात; पुरानी स्मार्ट क्लास पर उठे सवाल
पटना: बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को हाईटेक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में ‘बिहार स्कूल लाइव क्लासेज’ (Bihar School Live Classes Scheme) कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

इस योजना के तहत बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब प्राइवेट स्कूलों जैसी अत्याधुनिक शिक्षा मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए कहा कि “यह नए युग की ओर बिहार का एक और ऐतिहासिक कदम है।” इस योजना के विस्तार के माध्यम से 16 जुलाई 2026 से पटना के 150 सरकारी विद्यालयों में लाइव क्लासेज की शुरुआत हो गई है।
योजना के मुख्य बिंदु और लाभ:
- मुफ्त JEE, NEET और CUET की तैयारी: इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन छात्र-छात्राओं को मिलेगा जो मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करना चाहते हैं। अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को JEE, NEET और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बिल्कुल मुफ्त कराई जाएगी।
- कोचिंग पर निर्भरता होगी खत्म: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है कि छात्रों को बाहर प्राइवेट कोचिंग संस्थानों की जरूरत ही न पड़े।
- एआई (AI) और स्मार्ट पढ़ाई: इन स्कूलों में लाइव क्लासेज के साथ-साथ AI आधारित पढ़ाई और डिजिटल क्लासरूम की सुविधा भी मिलेगी।
- मॉडल स्कूलों का निर्माण: सरकार का लक्ष्य बिहार के सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने का भी है ताकि हर स्तर पर शिक्षा में सुधार हो सके।
पुरानी व्यवस्थाओं पर उठते सवाल और नई योजना के लिए चुनौतियां: शिक्षा विभाग के इस कदम को बिहार के छात्रों के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है, जिससे गरीब और मेधावी छात्रों को बिना पैसे के बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा। हालांकि, इस नई योजना की घोषणा के साथ ही सरकार की पिछली योजनाओं की विफलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों में पहले से ही लाखों रुपये खर्च कर ‘स्मार्ट क्लास’ की व्यवस्था की गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शिक्षकों के उचित तकनीकी प्रशिक्षण के अभाव, इंटरनेट की खराब कनेक्टिविटी और मेंटेनेंस न होने के कारण ज्यादातर स्कूलों में ये स्मार्ट टीवी और उपकरण सिर्फ धूल फांक रहे हैं।
पहले से मौजूद स्मार्ट क्लास की इस बदहाली ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि करोड़ों की लागत वाली यह नई ‘लाइव क्लास’ योजना भी पुरानी स्मार्ट क्लास व्यवस्था की तरह सिर्फ सफेद हाथी साबित न हो, बल्कि धरातल पर इसका वास्तविक और निरंतर लाभ छात्रों को मिल सके।



