महाघोटाला: लखनीपुर महेशपट्टी में मनरेगा के 3.21 लाख रुपये लूटने की थी तैयारी, शिकायत के बाद पेमेंट फ्रीज़; DRDA की जांच पर उठे सवाल
उजियारपुर (समस्तीपुर): समस्तीपुर ज़िले के उजियारपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत लखनीपुर महेशपट्टी में मनरेगा योजना के नाम पर एक बड़े घोटाले (महालूट) का पर्दाफाश हुआ है। कागज़ों पर रोज़ाना मज़दूर पसीना बहा रहे थे, लेकिन ज़मीनी हकीकत में काम के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार की फसल लहलहा रही थी। एक पुख्ता शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में लाखों रुपये का फर्जी पेमेंट फ्रीज़ कर दिया गया है।

95 प्रतिशत डमी मज़दूर, 1286 मानव दिवस का खेल
जानकारी के मुताबिक, पंचायत में काम के नाम पर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। इस सिंडिकेट की हिम्मत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने 95 प्रतिशत डमी और दूसरे राज्यों में रहने वाले प्रवासी मज़दूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी बना दी। कुल 1286 मानव दिवस (Person-days) दिखाकर सरकारी खजाने से 3 लाख 21 हज़ार 500 रुपये निकालने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन, सही समय पर हुई एक पुख्ता शिकायत ने इस लूट पर ब्रेक लगा दिया।
जांच के नाम पर अधिकारियों की महज़ ‘खानापूर्ति’
इस भारी घोटाले की सुगबुगाहट जब ज़िले तक पहुँची, तो समस्तीपुर DRDA (जिला ग्रामीण विकास अभिकरण) से एई (AE) सुधांशु कुमार और जेई (JE) सचिन कुमार लाव-लश्कर के साथ साइट पर ‘जांच’ करने पहुँचे। लेकिन हैरत की बात यह रही कि यह पूरी जांच महज़ एक ‘खानापूर्ति’ बनकर रह गई। मौके पर अधिकारियों ने ना तो पास हुए एस्टीमेट (Estimate) से काम का मिलान किया और ना ही कोई भौतिक नापी-जोखी (Measurement) की। अधिकारी आए, सिर्फ ज़मीन देखी और चलते बने।
बिना नापी-जोखी के कैसे बनेगी रिपोर्ट?
जांच के तरीके पर तब और भी गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब कैमरे पर अधिकारियों से पूछा गया कि ‘जांच में क्या गड़बड़ी मिली?’ इसके जवाब में अधिकारियों ने गोलमोल तरीके से कहा— “अभी तो सिर्फ देखे हैं, रिपोर्ट देखेंगे तब बताएंगे…”
अब यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब कार्यस्थल पर कोई भौतिक जांच (Physical Verification) ही नहीं हुई और एस्टीमेट के आधार पर नापी ही नहीं गई, तो बंद कमरे में बैठकर आख़िर रिपोर्ट कैसे तैयार होगी? स्थानीय लोगों में यह चर्चा तेज़ है कि क्या ज़िले से आई यह जांच टीम निचले स्तर के भ्रष्टाचारियों को बचाने का ‘रास्ता’ खोज रही है?
जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकीं नज़रें
फिलहाल के लिए फर्जी भुगतान का पैसा तो फ्रीज़ हो गया है, जो शिकायतकर्ता की एक बड़ी जीत है। लेकिन अब देखना दिलचस्प होगा कि समस्तीपुर ज़िला प्रशासन (DM) इस पूरे मनरेगा फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर क्या सख्त कार्रवाई करता है। क्या दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज होगी या फिर जांच की यह फाइल भी इस पंचायत की सूखी नाली की तरह धूल फांकती रह जाएगी।



