समस्तीपुर में नेटवर्क मार्केटिंग का भंडाफोड़: नौकरी के नाम पर बंधक बने 105 युवक-युवतियों का रेस्क्यू, 39 नाबालिग भी शामिल
बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस ने मानवाधिकार आयोग और मिशन मुक्ति फाउंडेशन के साथ मिलकर एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए नेटवर्क मार्केटिंग की आड़ में चल रहे मानव तस्करी और फर्जीवाड़े के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। बुधवार देर रात मुफस्सिल और नगर थाना क्षेत्रों के धरमपुर और मुसापुर सहित करीब छह मकानों पर की गई छापेमारी में कुल 105 युवक-युवतियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।

इनमें 67 युवक और 38 युवतियां शामिल हैं, जिनमें से सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 39 (10 लड़के और 29 लड़कियां) नाबालिग हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नौ लोगों को हिरासत में लिया है और इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह गोरखधंधा ‘लीड विजन ट्रेडिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से चल रहा था, जो ‘गेलवे’ (Galway) ब्रांड के उत्पाद बेचती थी। इस फर्जी कंपनी ने मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड जैसे राज्यों के बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाया था।
इन युवाओं को कृषि एवं अन्य सरकारी विभागों में पक्की नौकरी का लालच देकर समस्तीपुर बुलाया गया था। नौकरी दिलाने के एवज में प्रत्येक पीड़ित से 25,000 रुपये से लेकर 27,000 रुपये तक की मोटी रकम वसूली गई और उनके सभी मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Original Certificates) भी जब्त कर लिए गए।
सरकारी नौकरी का झांसा देकर बुलाए गए इन युवाओं को ‘ट्रेनिंग’ के नाम पर अलग-अलग बंद मकानों में बंधक बनाकर रखा गया था। रेस्क्यू किए गए पीड़ितों ने बताया कि उनसे पैसे लेने के बाद गली-गली घूमकर कॉस्मेटिक और अन्य उत्पाद बेचने का काम जबरन कराया जाता था। उन्हें रोजाना कम से कम 5,000 रुपये का सामान बेचने का कड़ा टारगेट दिया जाता था और विरोध करने पर नौकरी रद्द करने की धमकी दी जाती थी।
बंधक बनाए गए इन युवाओं को भरपेट खाना तक नहीं मिलता था; उन्हें रोज केवल चावल और सोयाबीन की सब्जी परोसी जाती थी। इसके अलावा, उन पर अपने जैसे अन्य बेरोजगार युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ने का दबाव डाला जाता था और कई-कई दिनों तक उन्हें अपने परिवार वालों से फोन पर बात भी नहीं करने दी जाती थी।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब असम की एक नाबालिग लड़की के परिजनों ने इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग और पुलिस से की। शिकायत के आधार पर एसपी अरविंद प्रताप सिंह की निगरानी में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया, जिसने गुप्त सूचना के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।
पुलिस की भनक लगते ही मुख्य आरोपी और कुछ स्टाफ दफ्तर पर ताला जड़कर फरार हो गए। फिलहाल, रेस्क्यू किए गए सभी लोगों को मुफस्सिल थाने लाकर उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। पुलिस पीड़ितों से लिखित शिकायतें लेकर दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है और नाबालिगों को बाल कल्याण समिति के माध्यम से उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन इस मामले को मानव तस्करी, अवैध रूप से बंधक बनाने और धोखाधड़ी के एंगल से गंभीरता से ले रहा है।



