बिहार के शिक्षा मॉडल की खुली पोल: लखनीपुर महेशपट्टी स्कूल में कीड़े वाला खाना और गंदा पानी पीने को मजबूर नौनिहाल, शिक्षा मंत्री पूरी तरह फेल
उजियारपुर (लखनीपुर महेशपट्टी): बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के चाहे जितने भी खोखले दावे कर ले, लेकिन उजियारपुर प्रखण्ड क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, लखनीपुर महेशपट्टी की दुर्दशा इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। यह विद्यालय सरकारी कुव्यवस्था, अधिकारियों की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का जीता-जागता स्मारक बन गया है। आलम यह है कि यहां बच्चे पढ़ने नहीं, बल्कि तिल-तिल कर बीमार पड़ने और व्यवस्था का दंश झेलने को मजबूर हैं।

बिना भवन के ‘प्लस टू’ और बीपीएससी शिक्षकों की फौज
सरकार की अदूरदर्शिता का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि बिना किसी बुनियादी ढांचे के ही विद्यालय को अपग्रेड करके ‘प्लस टू’ का दर्जा दे दिया गया।
- भेड़-बकरियों की तरह ठूंसे जा रहे छात्र: बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम का निर्माण तक नहीं हुआ है। इस भीषण गर्मी में बच्चों को पहले से बने हुए छोटे कमरों में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर बैठाया जाता है।
- खाली बैठकर दिन काट रहे शिक्षक: हाई स्कूल और प्लस टू की प्रधानाध्यापिका सरिता कुमारी के अनुसार, बहाल किए गए 10 नए शिक्षकों में सभी विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। 11वीं कक्षा में एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हुआ है, जबकि 12वीं में 30 नामांकित छात्रों में से मात्र 5-7 बच्चे ही स्कूल आते हैं। क्लासरूम और बच्चे न होने के कारण लाखों का वेतन उठाने वाले बीपीएससी शिक्षक दिन भर खाली बैठकर समय काटते हैं और वापस लौट जाते हैं।
मिड-डे मील के नाम पर परोसा जा रहा ‘जहर’
शिक्षा के साथ-साथ नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।
- खाने में कीड़े और बदबू: बच्चों का आरोप है कि बाहर से बनकर आने वाले भोजन से तेज बदबू आती है। कई बार खाने से कीड़े और लकड़ी के टुकड़े तक निकल चुके हैं।
- तानाशाही रवैया: जब मासूम इसकी शिकायत करते हैं, तो उन्हें यह कहकर डराया जाता है कि “जब टीचर लोग खा लेते हैं, तो तुम क्यों नहीं खाओगे?” इसके अलावा, बच्चों को खेलने के लिए कोई खेल सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई जाती है।
गंदा पानी और शौचालयों में भेदभाव: छात्रों के लिए नरक, शिक्षकों के लिए वीआईपी व्यवस्था
विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है:
- शौचालयों पर ताला और गंदगी का अंबार: स्कूल में 4 शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन बच्चों के लिए सिर्फ 1 से 2 ही खोले जाते हैं, बाकी पर ताला जड़ा रहता है। जो खुले हैं, उनमें साफ-सफाई शून्य है। भयंकर बदबू आती है और टूटे नलों से हर वक्त पानी बहता रहता है। मजबूरन बच्चों को इसी गंदगी में जाना पड़ता है या फिर खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। वहीं, शिक्षकों के लिए अलग से साफ-सुथरे शौचालय की ‘वीआईपी’ व्यवस्था है।
- बीमारी को दावत देता पीने का पानी: स्वच्छ पेयजल के नाम पर स्कूल में सिर्फ धोखा है। पानी साफ करने वाली मशीन (प्यूरिफायर) खराब पड़ी है। अब सीधे मोटर चलाकर टंकी में पानी भर दिया जाता है और वही अशुद्ध पानी बच्चों को पीने के लिए दे दिया जाता है, जिससे हर समय जलजनित बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है।
कुम्भकर्णी नींद में अधिकारी, सिस्टम पूरी तरह चौपट
इस भयानक कुव्यवस्था पर शिक्षा विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं। मिडिल स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक परीक्षण दास जी ने स्पष्ट बताया कि इन सारी गंभीर समस्याओं की जानकारी प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी को दी जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही और न ही कोई समाधान निकाला गया है।
इन तमाम हालातों को देखकर यह स्पष्ट है कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी शिक्षा मंत्रालय को संभालने में पूरी तरह से फेल साबित हो रहे हैं। धरातल पर बिहार की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है, और लखनीपुर महेशपट्टी का यह स्कूल सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर एक करारा तमाचा है।



