लखनीपुर महेशपट्टी मनरेगा महाघोटाला: पटना में DRDA की फजीहत, जाली हस्ताक्षर और बैकडोर पेमेंट पर आयुक्त ने दिया 1 हफ्ते का अल्टीमेटम
उजियारपुर (समस्तीपुर) | समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में हुए 3.21 लाख रुपये के मनरेगा घोटाले में भ्रष्ट सिंडिकेट (BPO, PRS, ठेकेदार और इंजीनियर) की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वाहा (नाले) की उड़ाही के नाम पर बिना मिट्टी काटे लाखों रुपये डकारने वाले अधिकारियों की पोल अब राज्य स्तर पर खुल चुकी है।

13 अगस्त को पटना में बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी की मनरेगा आयुक्त (IAS) के समक्ष जब इस घोटाले के पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य रखे गए, तो DRDA समस्तीपुर के अधिकारियों के पसीने छूट गए। आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए DRDA को 7 दिन के अंदर दोबारा जांच रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया है।
फीता सिर्फ दिखावे के लिए, बिना नापी दे दी ‘क्लीन चिट’
शिकायत के बाद घोटाले की लीपापोती करने के लिए समस्तीपुर DRDA से AE (सहायक अभियंता) सुधांशु कुमार और JE (कनीय अभियंता) सचिन कुमार कार्यस्थल पर पहुंचे थे। लेकिन Ujiarpur News के पास मौजूद वीडियो साक्ष्य बताते हैं कि यह जांच महज एक ‘नौटंकी’ थी। JE सचिन कुमार के हाथ में फीता ज़रूर था, लेकिन वह सिर्फ कैमरे को दिखाने के लिए लाया गया था। उस फीते से वाहा में एक इंच भी भौतिक नापी नहीं की गई। अधिकारियों ने सिर्फ ईंट के रास्ते पर टहलकर बंद कमरे में ‘कार्य संतोषप्रद’ है की फर्जी रिपोर्ट बनाकर अपने भ्रष्ट साथियों को क्लीन चिट दे दी।
कागजों की हेराफेरी और PO का ऑडियो लीक
इस घोटाले का सबसे खौफनाक पहलू रिकॉर्ड्स से की गई छेड़छाड़ है। सरकारी पेमेंट मेमो में दिखाया गया है कि कार्य 3 जून 2026 से 16 जून 2026 के बीच हुआ। लेकिन हमारे साक्ष्य इस झूठ को बेनकाब करते हैं:
- 13 जून 2026: उजियारपुर के PO (प्रोग्राम ऑफिसर) ने फोन कॉल पर खुद स्वीकार किया कि साइट पर “घास तक नहीं छीला गया है।”
- 21 जून 2026: कार्य समाप्ति के 5 दिन बाद का वीडियो मौजूद है, जिसमें वाहा में घना जंगल खड़ा है।
- 8 जुलाई 2026: AE की जांच से ठीक पहले आनन-फानन में वाहा का जंगल साफ करवाया गया, ताकि जांच का नाटक किया जा सके।
मजदूर का जाली हस्ताक्षर और 5 अगस्त का ‘बैकडोर पेमेंट’
खुद को फंसता देख AE और JE ने अपनी रिपोर्ट में एक प्रवासी मज़दूर प्रेमचंद सिंह (जॉब कार्ड- 4404) का हाथ से लिखा फर्जी स्व-घोषणा पत्र लगा दिया। लेकिन शिकायतकर्ता ने उस मज़दूर का असली शपथ पत्र हासिल कर लिया है। मज़दूर ने लिखित में दिया है कि वह कार्य अवधि के दौरान मध्य प्रदेश में था और अधिकारियों ने उसका जाली हस्ताक्षर बनाकर सरकारी जांच में लगाया है।
भ्रष्टाचार की इंतहा यहीं नहीं रुकी। एक तरफ CPGRAMS पर जांच चलने के कारण मनरेगा पोर्टल पर कार्य को ‘फ्रीज (Freeze)’ दिखाया जा रहा है (जहाँ कोई पेमेंट डेट शो नहीं कर रही), वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों ने सिस्टम को चकमा देकर 5 अगस्त 2026 को बैकडोर से जॉबकार्ड धारियों के खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
पटना में आयुक्त की फटकार: “ये सब क्या सुनने को मिल रहा है?”
स्थानीय स्तर पर जब न्याय नहीं मिला, तो शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने 13 अगस्त 2026 को पटना के पुराने सचिवालय में मनरेगा आयुक्त (IAS अनन्या सिंह) के समक्ष ये सारे ब्रह्मास्त्र (PO का ऑडियो, जाली हस्ताक्षर का हलफनामा और बैंक स्टेटमेंट) पेश कर दिए। सबूत देखते ही आयुक्त महोदया ने सख्त लहजे में वहां मौजूद समस्तीपुर DRDA के प्रतिनिधि को फटकार लगाई और कहा- “ये सब क्या सुनने को मिल रहा है? देखिए इन सब चीजों को!” आयुक्त ने DRDA प्रतिनिधि को सीधे 1 हफ्ते (7 दिन) के अंदर मामले की सघन जांच कर नई रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट आदेश दिया है।
अब समस्तीपुर DM और DDC पर निगाहें
पटना से मिले इस सख्त अल्टीमेटम के बाद अब उजियारपुर ब्लॉक से लेकर समस्तीपुर DRDA तक हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह है कि क्या 7 दिन के अंदर समस्तीपुर के DM और DDC इस महाघोटाले में शामिल AE, JE, BPO और ठेकेदार पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जाली हस्ताक्षर) और 477A (रिकॉर्ड में हेराफेरी) के तहत FIR का आदेश देते हैं, या फिर से सिस्टम इन भ्रष्टाचारियों को बचाने का कोई नया खेल रचेगा?
न्यायालय जाने की चेतावनी: कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट में घसीटे जाएंगे भ्रष्ट अधिकारी
शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इतने पुख्ता साक्ष्य (मज़दूर का जाली हस्ताक्षर, ऑडियो रिकॉर्डिंग, और बैकडोर पेमेंट के सबूत) सौंपने के बावजूद भी विभाग द्वारा लीपापोती की जाती है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। अगर 7 दिन के अल्टीमेटम के बाद भी भ्रष्ट अधिकारियों (AE, JE, BPO) और ठेकेदार पर FIR दर्ज कर उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया, तो इस मामले को सीधे माननीय न्यायालय (Court) के समक्ष ले जाया जाएगा।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि वे अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में परिवाद दायर करेंगे और न्यायालय से CrPC 156(3) (नए कानून BNSS के तहत) मुकदमा दर्ज करने के आदेश की मांग करेंगे। न्यायालय के आदेश से इन सभी जालसाज़ों पर धोखाधड़ी और गबन की धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई करवाई जाएगी। जनता के पैसे की इस खुली लूट को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
[Ujiarpur News की पैनी नज़र इस पूरे मामले पर बनी हुई है। जनता का पैसा लूटने वालों की हर खबर सबसे पहले सिर्फ यहाँ।]



