जमालपुर में रेलवे अधिकारी के 20 वर्षों से एक ही क्षेत्र में तैनाती पर RTI कार्यकर्ता ने खोला मोर्चा
जमालपुर/मुंगेर: पूर्व रेलवे के जमालपुर क्षेत्र में एक ही संवेदनशील पद पर एक अधिकारी के पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से जमे रहने का गंभीर मामला सामने आया है। मुंगेर जिले के धरहरा निवासी, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और RTI कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने अनियमितता करने वाले लोक सेवकों को सावधान करते हुए इस मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और रेलवे विजिलेंस से उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।

20 साल से एक ही क्षेत्र में तैनाती का आरोप
आरटीआई कार्यकर्ता ने विश्वस्त सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (P.Way-2) व PWay-2 इंचार्ज, श्री मनीष कुमार साह लगभग 20 वर्षों से जमालपुर रेल क्षेत्र में पदस्थापित हैं। आरोप है कि PW-1 में 8 वर्ष से अधिक इंचार्ज रहने के बाद उनका तबादला भागलपुर हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें फिर से PW-2 में इंचार्ज बना दिया गया। प्रसाद का कहना है कि यह केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के उन दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जिनमें संवेदनशील पदों पर अधिकतम कार्यकाल 4 वर्ष निर्धारित किया गया है।
मेडिकल फिटनेस और यात्री सुरक्षा पर भी उठे सवाल
विज्ञप्ति में अधिकारी की मेडिकल फिटनेस (PME) और कार्य-क्षमता पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक (पूर्व रेलवे, कोलकाता) को भेजे गए पत्र के हवाले से दावा किया गया है कि दुर्घटना के कारण बिना सहारे चलने में असमर्थ होने के बावजूद उन्हें एक ही दिन में फिट घोषित कर फील्ड ड्यूटी (PW-2) पर रखा गया है।
इसके अलावा यात्री सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा भी उठाया गया है। आरोप है कि धरहरा-अभयपुर-महराना खंड पर ट्रैक में झटके (Track Jerk) की घटना के दौरान संबंधित इंचार्ज मौके पर नहीं पहुँचे थे। इसे रेलवे एक्ट 1989 की धारा 113 और 152 के तहत यात्री सुरक्षा के दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बताया गया है।
आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग
श्याम मुरारी प्रसाद ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(b) के तहत अधिकारी की ज्ञात आय और संपत्ति की सक्षम प्राधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है।
RTI कार्यकर्ता की प्रमुख मांगें:
- CVC और रेलवे विजिलेंस की निगरानी में पूरे मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच हो।
- अधिकारी की PME (मेडिकल) फाइल और पोस्टिंग हिस्ट्री की पारदर्शी समीक्षा की जाए।
- रेलवे में 4 वर्ष की रोटेशन पॉलिसी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।
- RTI अधिनियम की धारा 4(1)b के तहत ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए।
श्याम मुरारी प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस प्रकरण पर कोई RTI दायर नहीं की गई है, बल्कि विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आज से इसकी दस्तावेजी शुरुआत की जा रही है। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ एक जरिया हूँ, न्याय माताजी के हाथ में है। अब देखना यह है कि इस गंभीर खुलासे के बाद रेलवे प्रशासन और विजिलेंस विभाग क्या कदम उठाता है।



