शिक्षकों के वेतन-सत्यापन में पारदर्शिता की मांग, RTI कार्यकर्ता ने उठाए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
मुंगेर: भागलपुर में हाल ही में उजागर हुए 98 लाख रुपये के फर्जी शिक्षिका घोटाले के बाद, बिहार सरकार के वित्त विभाग ने पूरे राज्य में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन-भत्तों की शत-प्रतिशत जांच का निर्देश दिया है। यह जांच अक्टूबर माह के वेतन भुगतान से पहले पूरी की जानी है। इसी क्रम में मुंगेर जिले में भी शिक्षकों के डेटा सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

धरहरा, मुंगेर के रहने वाले वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और जाने-माने RTI कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद ने इस मुद्दे पर मुंगेर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के हालिया आदेश पर सवाल खड़े करते हुए पारदर्शिता की मांग की है।
क्या है मुंगेर DEO का आदेश?
जिला शिक्षा पदाधिकारी, मुंगेर कार्यालय द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को जारी एक कार्यालय आदेश (ज्ञापांक- 1226) के अनुसार, मुंगेर जिले के अंतर्गत आने वाले प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सभी कोटि के शिक्षकों के डेटा का सत्यापन किया जाना अनिवार्य है। इसके लिए श्रीमती सुष्मिता भारद्वाज (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा-सह-साक्षरता मुंगेर) की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है, जिसमें निम्नवर्गीय लिपिक श्री तुषार दक्ष और डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री विशाल कुमार शामिल हैं।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिदिन शाम 4:30 बजे 50 शिक्षकों को संबंधित अभिलेखों (डॉक्युमेंट्स) के साथ कार्यालय में उपस्थित होना होगा। प्रखंडवार शिक्षकों को बुलाने की सूची भी जारी की गई है।
RTI कार्यकर्ता की आपत्तियां और सवाल
श्याम मुरारी प्रसाद का कहना है कि यद्यपि DEO मुंगेर ने एक कोषांग का गठन कर दिया है, लेकिन पूरी प्रक्रिया को अभी तक पारदर्शी नहीं बनाया गया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “जिले में अभी तक कोई सार्वजनिक टीम, विस्तृत समय-सारणी, जांच के स्पष्ट बिंदु या अंतिम तिथि नोटिस बोर्ड या जिला वेबसाइट पर जारी नहीं की गई है। यह सिर्फ एक विभागीय आदेश तक सीमित लग रहा है, जबकि यह सरकारी खजाने की सुरक्षा और ईमानदार शिक्षकों के सम्मान का सीधा सवाल है।”
RTI कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद की जिला शिक्षा पदाधिकारी से 4 प्रमुख मांगें:
- विस्तृत कोषांग का गठन: तुरंत एक जिला स्तरीय वेतन सत्यापन कोषांग बनाया जाए, जिसमें DEO, DPO (स्थापना), जिला कोषागार पदाधिकारी (ट्रेजरी ऑफिसर) और कम से कम दो शिक्षक प्रतिनिधि भी शामिल हों, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष रहे।
- सार्वजनिक सूचना: कोषांग के सदस्यों के नाम, जांच के बिंदु (जैसे HRMS डेटा, सेवा-पुस्तिका का मिलान, बैंक खाता मिलान) और जांच पूरी करने की अंतिम तिथि तुरंत नोटिस बोर्ड और मुंगेर जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए।
- जवाबदेही तय हो (‘मेकर-चेकर-अप्रूवर’): वित्त विभाग के निर्देशों के अनुरूप ‘मेकर-चेकर-अप्रूवर’ की जिम्मेदारी लिखित में तय की जाए। यदि भविष्य में कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो उसकी सीधी जवाबदेही तय हो और गलत भुगतान की रिकवरी सुनिश्चित हो सके।
- RTI के तहत त्वरित रिपोर्ट: पूरी जांच रिपोर्ट RTI के तहत मांगे जाने पर बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाए।
श्याम मुरारी प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सिस्टम में सुधार और हर एक ईमानदार शिक्षक के सम्मान की रक्षा के लिए है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुंगेर का शिक्षा विभाग इन मांगों पर क्या संज्ञान लेता है और वेतन-सत्यापन की यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया कितनी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाती है।



