उजियारपुर में महागठबंधन का प्रदर्शन, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, पीएम मोदी, और अमित शाह का किया पुतला दहन
उजियारपुर/समस्तीपुर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महागठबंधन का राज्यव्यापी आंदोलन आज उजियारपुर में भी देखने को मिला। महागठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक साथ मिलकर पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता प्रखंड मुख्यालय से होते हुए महावीर मंदिर तक पहुंचे। उन्होंने रास्ते भर “वोट चोर गद्दी छोड़”, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो”, और “ज्ञानेश कुमार मुर्दाबाद, हाय-हाय” जैसे नारे लगाए। अंततः, प्रखंड मुख्यालय के चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का पुतला दहन किया।
माकपा के अंचल मंत्री, उपेन्द्र राय ने इस विरोध प्रदर्शन का कारण बताते हुए कहा कि पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अनुचित कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के दो सदस्य पिछले कुछ समय में 14 बार चुनाव आयोग की बैठकों में शामिल हुए और 10 बार मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों पर आपत्ति जताई। इन आपत्तियों के बावजूद, उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। इसी के विरोध में दोनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया।
उपेन्द्र राय ने कहा, “चुनाव आयुक्त की जो कमजोरी है, उनकी जो ‘नंगई’ है, उसके खिलाफ आज पूरे बिहार में इंडिया गठबंधन के घटक दलों द्वारा प्रखंड मुख्यालयों पर अमित शाह, नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाकर उनके इस्तीफे की मांग की गई है।”
भाकपा माले के एक नेता ने भी इस प्रदर्शन में अपने विचार रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनाव चोर हैं और उनका फायदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने चुनाव आयुक्त को ऐसी ताकत दी है जो देश के राष्ट्रपति के पास भी नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यालय से सीमा खन्ना के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जोड़े जा रहे हैं, जबकि 2024 के बाद नए मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी पालन नहीं कर रहा है। उनका आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में चुनावों में चोरी और धांधली हुई है और 10% वोट फर्जी तरीके से जोड़े गए हैं। उन्होंने कहा, “ईवीएम में हेरफेर करके ऊपर से वोट गिरा दिया जाता है”।
उन्होंने मांग की कि इस सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए और चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो महागठबंधन के लोग सड़क पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने महागठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि वे इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे और जनता के वोट के अधिकार और लोकतंत्र को बचाएंगे।
यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। महागठबंधन के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी तेज हो सकता है। कॉंग्रेस नेता अनिल कुशवाहा ने भी चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा की वोट चोरी करवाने वाले ज्ञानेश कुमार सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी इस्तीफा देनी चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन में राजद, कांग्रेस, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भाकपा माले सहित अन्य सभी पार्टियों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। इनमें माकपा अंचल मंत्री उपेन्द्र राय, माकपा के जिला मंत्री रामाश्रय महतो, राजद के राम लॉलिन राय, राजेश्वर महतो (जिला अध्यक्ष), राजीव गुप्ता (प्रखंड प्रधान महासचिव), माकपा के सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा, कॉंग्रेस नेता अनिल कुशवाहा, दिनेश पासवान, उमेश साहनी, राम निवास राय, राम प्रवेश राय, नौजवान सभा (डीवाईएफआई) के अंचल मंत्री अशोक पुष्पम, उमेश कुँवर, मो इममुद्दीन, जगदीश महतो, उमेश मल्लिक, राम विनोद शर्मा, रंजीत पोद्दार, नरेश शर्मा, कांग्रेस के बाला झा, मुकेश चौधरी, अनिल कुमार, मो अशरफ अली, प्रभात कुमार राय आदि शामिल थे।



