समस्तीपुर: पैक्स एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों की बैठक संपन्न, धान अधिप्राप्ति की समस्याओं और बकाये पर जताया कड़ा रोष
आज समस्तीपुर जिले के मोहनपुर स्थित यू.एन. पैलेस में जिले के सभी पैक्स (PACS) एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस अहम बैठक की अध्यक्षता समस्तीपुर केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री विनोद कुमार राय ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन बैंक के उपाध्यक्ष श्री सुनील कुमार द्वारा किया गया। बैठक में बैंक के निदेशक मंडल के सदस्यों के साथ-साथ जिले भर के व्यापार मंडल और पैक्स के अध्यक्षों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी धान अधिप्राप्ति (खरीद) में आ रही गंभीर कठिनाइयों और विभागीय असहयोग पर मंथन करना था। बैठक के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें मुख्य रूप से अधिप्राप्ति मद में अतिरिक्त सूद (ब्याज) का भुगतान, राज्य खाद्य निगम (SFC) के साथ त्रिपक्षीय समझौता, मिल टैगिंग में पैक्सों को पूर्ण स्वायत्तता देने, अग्रिम सीएमआर (CMR) व्यवस्था लागू करने और चावल आपूर्ति के एवज में लंबित भुगतान की मांगें शामिल थीं।
एसएफसी (SFC) और एफसीआई (FCI) पर समय पर भुगतान न करने का आरोप
इस अवसर पर प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए समस्तीपुर केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष विनोद कुमार राय ने सरकार और संबंधित एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पैक्स, सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में जमीनी स्तर पर पूरी निष्ठा से काम करते हैं, लेकिन SFC और FCI द्वारा समय पर भुगतान न किए जाने के कारण समितियों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
यही स्थिति रही तो सभी 381 पैक्स चले जाएंगे घाटे में
श्री राय ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वर्तमान समय में जिले की करीब 200 सोसायटियां बीआर एक्ट (BR Act) के दायरे में जा चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार और एजेंसियों का यही रवैया बरकरार रहा, तो आने वाले समय में जिले के सभी 381 पैक्स और 20 व्यापार मंडल पूरी तरह से घाटे (लॉस) में चले जाएंगे और उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
पूरे बिहार में चल रहा है आंदोलन
समितियों को बचाने के लिए श्री विनोद कुमार राय ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि भुगतान में होने वाली देरी के कारण समितियों पर जो 6 से 7 महीने के अतिरिक्त ब्याज का बोझ पड़ा है, सरकार उसकी भरपाई तुरंत करे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल समस्तीपुर की समस्या नहीं है, बल्कि अपनी मांगों को लेकर यह आंदोलन पूरे बिहार के 37-38 जिलों में एक साथ चलाया जा रहा है। बैठक के अंत में सभी अध्यक्षों ने एक स्वर में निर्णय लिया कि यदि उनकी मांगें समय रहते नहीं मानी गईं, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।




