उजियारपुर का ‘देवखाल चौर’ बना संरक्षित आर्द्रभूमि (Wetland), निगरानी के लिए लॉन्च हुआ ‘सेव बिहार वेटलैंड्स’ ऐप
समस्तीपुर/पटना: पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण की दिशा में बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समस्तीपुर जिले के उजियारपुर स्थित ऐतिहासिक ‘देवखाल चौर’ को आधिकारिक तौर पर बिहार के वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। इस महत्वपूर्ण जल निकाय को अतिक्रमण से बचाने और इसका वैज्ञानिक प्रलेखन (Documentation) करने के लिए वन विभाग ने “सेव बिहार वेटलैंड्स” (Save Bihar Wetlands) मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया है।

शुक्रवार को देवखाल चौर परिसर में ही वन कर्मियों के लिए एक विशेष ‘क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ (Capacity Building Program) का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें इस नए ऐप के इस्तेमाल की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई।
500 एकड़ में फैला है देवखाल चौर
उजियारपुर का देवखाल चौर सिर्फ एक आम जल निकाय नहीं है। यह लगभग 500 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ साल भर पानी जमा रहता है। यह चौर स्थानीय जैव विविधता (Biodiversity) और जलीय जीवों के लिए एक प्राकृतिक घर का काम करता है। इसे संरक्षित घोषित किए जाने से अब आम लोगों को भी इस चौर के बारे में डिजिटल माध्यमों से विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी रजनीश राय ने जानकारी दी कि राज्यभर की आर्द्रभूमियों के दस्तावेज और संरक्षण योजनाओं को सुगम बनाने के लिए ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा यह ऐप विकसित किया गया है।
क्या करेगा “सेव बिहार वेटलैंड्स” ऐप?
यह हाई-टेक मोबाइल एप्लिकेशन कई अहम पर्यावरण मानकों पर काम करेगा:
- जल गुणवत्ता और जैव विविधता: जल निकाय में पानी की स्थिति और वहाँ पनपने वाले जीव-जंतुओं का डेटा बेस तैयार होगा।
- जियो-टैगिंग (Geo-Tagging): चौर की सटीक भौगोलिक स्थिति और उसकी सीमाओं को डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा।
- अतिक्रमण की निगरानी: अगर चौर के आसपास कोई अवैध अतिक्रमण या जल निकायों पर कोई संभावित खतरा होता है, तो उसकी तुरंत रिपोर्टिंग ऐप के जरिए की जा सकेगी।
वनकर्मियों को मिली विशेष ट्रेनिंग
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (जलवायु परिवर्तन एवं आर्द्रभूमि) के दिशा-निर्देशों पर क्षेत्र स्तरीय कर्मियों और वन रक्षकों ने ऐप के माध्यम से दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शुक्रवार को हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में आर्द्रभूमि विशेषज्ञ डॉ. सरोज कुमार ने वन प्रमंडल के कर्मचारियों को मौके पर ही ट्रेनिंग दी। वनकर्मियों को सिखाया गया कि कैसे ऐप में डेटा डालना है, जियो-टैगिंग कैसे करनी है और खतरों की रिपोर्टिंग कैसे सबमिट करनी है। इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य अग्रिम पंक्ति (Frontline) के वनकर्मियों की मदद से आर्द्रभूमियों का वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित करना है।
बिहार में 3,911 जल निकायों की हुई है पहचान
आपको बता दें कि बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (Bihar State Wetland Authority) ने पूरे राज्य में वेटलैंड्स का व्यापक सर्वेक्षण (Survey) कराया है। इस सर्वेक्षण में बिहार के सभी जिलों में 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले कुल 3,911 जल निकायों की पहचान की गई है, जिन्हें संरक्षित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। समस्तीपुर का देवखाल चौर इसी बड़ी मुहिम का एक चमकता हुआ हिस्सा बन गया है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि ‘सेव बिहार वेटलैंड्स’ ऐप जैसी तकनीक से न सिर्फ बिहार का इकोलॉजिकल बैलेंस (पारिस्थितिक संतुलन) सुधरेगा, बल्कि भविष्य में इन जगहों को ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा।



