बिहार में 15 मई से बदल जाएंगे जमीन खरीद-बिक्री के नियम; जानें ’10 दिन के वेटिंग पीरियड’ की पूरी सच्चाई
पटना (Bihar News): अगर आप बिहार में अपने सपनों का घर बनाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। राज्य में जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़े, डबल रजिस्ट्री और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए सरकार 15 मई से एक नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने जा रही है।

राजस्व और निबंधन विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। अब बिना सरकारी जांच-पड़ताल के किसी भी जमीन की रजिस्ट्री संभव नहीं होगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नया नियम क्या है और इससे आम खरीदारों को क्या फायदा होगा।
क्या है 15 मई से लागू होने वाली नई व्यवस्था?
अब तक बिहार में खरीदार और विक्रेता सीधे रजिस्ट्री ऑफिस जाकर कागजी कार्यवाही पूरी कर लेते थे, जिसका फायदा भू-माफिया और जालसाज उठाते थे। लेकिन 15 मई के बाद, जमीन खरीदने वालों को निबंधन (रजिस्ट्री) से पहले 10 दिनों का वेटिंग पीरियड (प्रतीक्षा अवधि) गुजारना होगा। इस दौरान सरकारी तंत्र उस जमीन की पूरी ‘कुंडली’ खंगालेगा ताकि खरीदार के पैसे किसी विवादित संपत्ति में न फंसें।
पोर्टल पर देनी होगी 13 अहम जानकारियां
नई प्रक्रिया के तहत, जमीन की खरीद-बिक्री से पहले आवेदक (खरीदार और विक्रेता) को ‘ई-निबंधन पोर्टल’ पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सिर्फ पुराने कागज लेकर रजिस्ट्री ऑफिस जाना अब काफी नहीं होगा। आवेदन करते समय जमीन से जुड़ी 13 प्रकार की अनिवार्य जानकारियां देनी होंगी।
जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं- खाता संख्या (Khata Number), खेसरा संख्या (Plot Number), रकबा (जमीन का क्षेत्रफल), चौहद्दी (जमीन की सीमाएं), वर्तमान जमाबंदी की स्थिति, विक्रेता का पूरा विवरण। साथ ही, विक्रेता को यह प्रमाणित करना होगा कि वह जमीन किसी भी पुराने विवाद, सरकारी रोक या बैंक के बकाया कर्ज (Loan) से पूरी तरह मुक्त है।
अंचल अधिकारी (CO) करेंगे कड़ाई से जांच
जैसे ही आप पोर्टल पर आवेदन करेंगे, उसकी सूचना सीधे संबंधित इलाके के अंचल अधिकारी (CO) के पास पहुंच जाएगी। सरकार ने अंचल अधिकारियों को जांच पूरी करने के लिए 10 दिनों की समय-सीमा दी है। इस दौरान CO इन मुख्य बातों की जांच करेंगे:
- क्या विक्रेता ही जमीन का असली और वर्तमान मालिक है?
- कहीं यह जमीन सरकारी या किसी प्रतिबंधित श्रेणी की तो नहीं है?
- जमीन पर किसी अदालत में कोई केस तो लंबित नहीं है?
- पोर्टल पर दी गई चौहद्दी और रकबा सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं?
जब CO इन सभी पैमानों पर अपनी ‘क्लीन चिट’ (सर्टिफाइड रिपोर्ट) दे देंगे, तभी खरीदार को रजिस्ट्री के लिए स्लॉट आवंटित किया जाएगा।
अगर 10 दिन में रिपोर्ट नहीं आई तो क्या होगा?
प्रक्रिया को लालफीताशाही से बचाने के लिए सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं। यदि अंचल अधिकारी निर्धारित 10 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड नहीं करते हैं, तो सिस्टम पोर्टल पर दी गई जानकारी को ही आधार मानते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ा देगा। हालांकि, ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारी (CO) की जवाबदेही तय की जाएगी और उन पर कार्रवाई हो सकती है।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
बिहार में जमीन विवादों का सबसे बड़ा कारण यह रहा है कि खरीदार अनजाने में ऐसी जमीन खरीद लेते थे जिस पर पहले से ही किसी परिवार का विवाद चल रहा हो या बैंक का कर्ज हो। नई व्यवस्था एक सुरक्षा कवच का काम करेगी।
- फर्जीवाड़ा खत्म: एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने वाले गिरोहों पर नकेल कसेगी।
- पैसों की सुरक्षा: आम आदमी की गाढ़ी कमाई कानूनी पचड़ों में फंसने से बचेगी।
- हिंसक घटनाओं में कमी: जमीन विवादों के कारण होने वाले आपसी झगड़ों और हिंसक घटनाओं में भारी गिरावट आएगी।
सरकार के ‘सात निश्चय-3’ (सबका सम्मान, जीवन आसान) संकल्प के तहत उठाया गया यह कदम बिहार के रियल एस्टेट और आम लोगों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। 10 दिनों का इंतजार भले ही प्रक्रिया को थोड़ा लंबा बनाए, लेकिन यह भविष्य के सालों लंबे कोर्ट-कचहरी के मुकदमों और मानसिक तनाव से 100% बचाएगा।
विभाग ने सभी अंचलाधिकारियों को इस नए सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग दे दी है और किसी भी तकनीकी दिक्कत से निपटने के लिए मोबाइल यूनिट्स भी तैनात कर दी गई हैं। 15 मई से बिहार में जमीन खरीदने का मतलब अब ‘भरोसा’ और ‘सुरक्षा’ होगा।



