लखनीपुर महेशपट्टी: मनरेगा के 3.21 लाख के घोटाले में ‘अंधेरगर्दी’, AE ने बिना नापी किए दी ‘क्लीन चिट’, वीडियो ने खोली पोल
उजियारपुर (समस्तीपुर) | विशेष रिपोर्ट: Ujiarpur News समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लखनीपुर महेशपट्टी में मनरेगा योजना के तहत हुए एक बड़े घोटाले को दबाने की घिनौनी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। कागज़ों पर 95% फर्जी मज़दूरों की हाजिरी बनाकर ₹3,21,500 डकारने की तैयारी थी। शिकायत के बाद जब मामला तूल पकड़ा और समस्तीपुर DRDA के अधिकारी जांच करने पहुंचे, तो उन्होंने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने के लिए एक ‘फर्जी और मनगढ़ंत’ जांच रिपोर्ट (क्लीन चिट) सौंप दी।

लेकिन, मौके पर मौजूद कैमरे और वीडियो सबूतों ने अधिकारियों की इस ‘लीपापोती’ की पोल खोलकर रख दी है। अब यह मामला राज्य के नोडल अधिकारी और दिल्ली (ग्रामीण विकास मंत्रालय) तक पहुँच चुका है।
क्या है पूरा मनरेगा महाघोटाला?
लखनीपुर महेशपट्टी में एक बड़े सिंडिकेट (जिसमें BPO, PRS और ठेकेदार शामिल हैं) द्वारा मनरेगा के तहत चार योजनाओं (कोड: 20655194, 20663561, 20660752, व 20646304) में बिना कोई भौतिक कार्य किए पैसे निकालने का खेल चल रहा था। 1286 मानव दिवस का फर्जी मस्टर रोल तैयार किया गया। हद तो तब हो गई जब बिहार के बाहर रहने वाले प्रवासी मज़दूरों को भी कार्यस्थल पर काम करते हुए दिखा दिया गया। एक पुख्ता शिकायत के बाद इन योजनाओं का पेमेंट फ्रीज़ कर दिया गया।
DRDA की जांच या भ्रष्टाचारियों को बचाने की ‘सेटिंग’?
CPGRAMS पर हुई शिकायत के बाद समस्तीपुर DRDA से सहायक अभियंता (AE) सुधांशु कुमार और जेई (JE) सचिन कुमार कार्यस्थल पर जांच करने पहुँचे। लेकिन ‘Ujiarpur News’ के पास मौजूद एक्सक्लूसिव वीडियो सबूत यह साबित करते हैं कि यह जांच सिर्फ एक दिखावा थी। AE ने अपनी रिपोर्ट में योजना को “संतोषप्रद” बताकर केस बंद करने की सिफारिश कर दी। लेकिन इस रिपोर्ट में कई झोल हैं:

- गायब मिट्टी का रहस्य: नाले (वाहा) की उड़ाही के नाम पर लाखों रुपये का बिल पास कराया जा रहा है, लेकिन मौके पर दोनों किनारों पर कोई ताजी खोदी गई मिट्टी नहीं है। सिर्फ कुछ मज़दूरों को लगाकर जंगल और झाड़ियाँ साफ करवा दी गईं।
- बिना फीता लगाए नापी: AE ने स्वीकृत प्राक्कलन (Estimate) और मापी पुस्तिका (M.B.) के आधार पर कोई भौतिक नापी (Physical Verification) नहीं की। बिना नापी के बंद कमरे में रिपोर्ट तैयार कर ली गई।
- योजना का दोहराव (Duplication): अधिकारियों ने यह बात अपनी रिपोर्ट में जानबूझकर छिपा ली कि जिस नाले की उड़ाही का पैसा निकाला जा रहा है, उसी नाले पर महज़ 2 वर्ष पहले ही उड़ाही का कार्य सफलतापूर्वक दिखाकर पैसे निकाले जा चुके हैं।
फर्जी स्व-घोषणा पत्र और ‘डिजिटल सबूतों’ से खिलवाड़

इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘फर्जीवाड़ा’ है। जांच रिपोर्ट में एक प्रवासी मज़दूर प्रेमचंद सिंह (जॉब कार्ड- 4404) का हाथ से लिखा हुआ एक स्व-घोषणा पत्र संलग्न किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि वह गाँव में रहकर काम कर रहा था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घोषणा पत्र ठेकेदार द्वारा फर्जी हस्ताक्षर करके बनवाया गया है। जांच अधिकारी (AE) ने जानबूझकर उस मज़दूर की मोबाइल लोकेशन (Call Detail Record – CDR) और बैंक/ATM ट्रांजेक्शन की जांच नहीं की, क्योंकि वैज्ञानिक जांच होते ही अधिकारी और ठेकेदार दोनों जेल चले जाते।
मंत्रालय में अपील दर्ज, अब BPO और AE पर गिरेगी गाज!
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की इस अंधेरगर्दी के खिलाफ शिकायतकर्ता ने सीधे राज्य के नोडल अधिकारी और भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय को CPGRAMS पोर्टल पर ‘अपील’ (Appeal) दर्ज कर दी है।
अपील में की गई हैं ये 4 बड़ी माँगें:
- AE द्वारा सौंपी गई इस फर्जी ‘क्लीन चिट’ रिपोर्ट को तुरंत रद्द किया जाए।
- राज्य स्तरीय विजिलेंस टीम (Vigilance Squad) या स्वतंत्र कार्यपालक अभियंता (EE) से कार्यस्थल की दोबारा भौतिक नापी कराई जाए।
- कथित मज़दूरों की मोबाइल लोकेशन (CDR) की वैज्ञानिक जांच हो।
- फर्जी दस्तावेज (हस्ताक्षर) सौंपने और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में BPO, PRS और ठेकेदार पर IPC की धारा 467/468 के तहत FIR दर्ज हो।
अब नज़रें ज़िलाधिकारी (DM) पर
समस्तीपुर प्रशासन हमेशा से पारदर्शी जांच के दावे करता रहा है, लेकिन लखनीपुर महेशपट्टी का यह मामला सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या समस्तीपुर DM और DDC इस वीडियो सबूत और फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर भ्रष्ट सिंडिकेट पर एफआईआर (FIR) का आदेश देते हैं, या फिर यह पूरी व्यवस्था इसी तरह ठेकेदारों की जेब में समाई रहेगी?
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